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- शरद मिश्रा
चित्रकूट। राष्ट्रीय रामायण मेले में ज्ञान, वैराग्य और भक्ति की अविरल धारा प्रवाहित हुई। छत्तीसगढ़ से आए विद्वान रामलोचन तिवारी ने अपने प्रवचन में गीद्धराज जटायु के चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान के नाम का जप और उनकी कृपा से सभी कष्ट दूर हो सकते हैं।

उन्होंने बताया कि जब माता सीता का विलाप हुआ, तो जटायु ने भी “हा राम” मंत्र को ही जपा। जब भगवान श्रीराम ने जटायु को स्पर्श किया, तो उनकी सभी पीड़ाएं समाप्त हो गईं। उन्होंने तुलसीदास जी के दोहे का उल्लेख करते हुए कहा “कर सरोज निज परसेउ कृपा सिंधु रघुवीर। निरखि राम छवि धाम प्रभु, विगत भई सब पीर।” इसी प्रकार, जब भगवान श्रीराम ने सुग्रीव को भी स्पर्श किया था, तो उनकी सारी पीड़ाएं समाप्त हो गई थीं।

मानस मर्मज्ञ राम प्रताप शुक्ल नें कहा की माता पिता की सेवा के साथ रामचरित मानस का श्रवण मोक्ष के द्वार खोल देता हैं। रामलोचन तिवारी ने कहा कि भगवान की भक्ति के बिना मनुष्य का जीवन वैसा ही होता है, जैसे व्यंजनों में नमक न होने से उनका स्वाद नीरस हो जाता है। भक्ति से ही जीवन में आनंद और संतोष की प्राप्ति होती है। रामायण मेले में प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और रामकथा के दिव्य संदेश को आत्मसात किया।
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