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अवधूत महाराज के निधन से शोक : हठ साधना से छोटा सा गांव बना दिया सिमौनी धाम
उत्तर प्रदेश

अवधूत महाराज के निधन से शोक : हठ साधना से छोटा सा गांव बना दिया सिमौनी धाम

विनोद कुमार मिश्रा ( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )

  • विनोद मिश्रा

बांदा। सिमौनी धाम स्वामी अवधूत महाराज के आकस्मिक निधन से बांदा का अध्यात्म क्षेत्र हतप्रभ है। दिल्ली में उनका निधन हुआ। और वही शाम को पंचतत्व में विलीन हो गये। आइये अवधूत महाराज के तपस्वी बनने की कहानी पर नजर डालते हैं तो उन्होंने सिमौनी गांव के बगल से बह रही गडरा नदी में खड़े होकर धूप व बारिश के बीच घोर तपस्या कर सिद्धि प्राप्त की थी, वे शुरू से ही हठी स्वभाव के रहे, इसी हठ ने उन्हें उनकी घोर साधना के संकल्प को पूरा कराया। उनकी साधना से ही छोटा सा गांव सिमौनी, सिमौनी धाम के नाम से देश में विख्यात हो गया।

अवधूत महाराज के निधन से शोक : हठ साधना से छोटा सा गांव बना दिया सिमौनी धाम

बबेरू तहसील मुख्यालय से 13 किमी. दूर ग्राम सिमौनी में 9वर्ष 1923 में पं. रामनाथ के घर एक बेटे का जन्म हुआ। जिसका नाम बलराम रखा गया। वही बालक आगे चलकर स्वामी अवधूत महाराज के नाम से प्रसिद्ध हुआ। स्वामी जी ने प्रारंभिक स्तर की शिक्षा ग्रहण करने के बाद हठ साधना के पूर्व राजनीति के क्षेत्र में उतरकर वर्ष 1955 में ग्राम प्रधानी के चुनाव में भाग्य आजमाया। पराजय के बाद घर छोड़कर वैराग्य धारण कर रात्रि में चित्रकूट स्थित ब्रह्मलीन परशुराम स्वामी जी के आश्रम में जाकर वस्त्र त्याग कर संत बनने की दीक्षा ली।

अवधूत महाराज के निधन से शोक : हठ साधना से छोटा सा गांव बना दिया सिमौनी धाम

कुछ दिन रुकने के बाद गुरु आश्रम से खड़ाऊ व कमंडल लेकर चले गए। वृंदावन में भी कुछ दिनों तक साधना किया। वहां से पुनः आश्रम लौटे। अति प्राचीन साधना स्थली सिमौनी जोकि देव पुरुष श्याम मौनी के नाम से प्रख्यात हुआ। वर्ष 1966 में गौरक्षा आंदोलन में संतों के ऊपर गोली चलने के दौरान वहां भी योद्धा की तरह डटे रहे और जेल भी गए। वर्ष 1967 में स्वामी जी को हनुमान जी ने स्वप्न दिया कि भंडारा करो तभी से मौनी बाबा की समाधि स्थल पर प्रथम भंडारा छोटे रूप में शुरू किया गया। इसके बाद स्वामी जी ने उज्जैन के क्षिप्रा नदी के किनारे आश्रम बनाकर तपस्या की। यहां पांच वर्ष गुजारे।

अवधूत महाराज के निधन से शोक : हठ साधना से छोटा सा गांव बना दिया सिमौनी धाम

दिल्ली के घड़ौली में अवधूत आश्रम बनाकर भक्तों सहित रहकर तप साधना में लीन हो गए। हर वर्ष 15 से 17 दिसंबर तक मेला व भंडारे का आयोजन होता है। जिसमें लाखें की तादाद में श्रद्धालु पहुंचते हैं और बाबा का आशीर्वाद प्राप्त कर भंडारे में प्रसाद ग्रहण करते रहे हैं। हनुमान जी के परम उपासक बलराम अवधूत महाराज द्वारा जहां सिमौनी धाम में हर साल विशाल भंडारा कराया जाता है। वही वर्ष 1969 में अखंड राम नाम संकीर्तन की शुरुआत कराई जो लगातार आज भी जारी है। अब उनके निधन से भक्तों में शोक लहर है।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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