- विनोद मिश्रा
बांदा। बेरोजगारों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मनरेगा योजना संचालित है। जिसके तहत तालाब, मेडबंदी आदि के जैसे तमाम विकास कार्यों में काम लिया जाता है। लेकिन इधर बारिश ने मनरेगा कार्यों को बंद सा कर दिया है। जिससे हजारों मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। ऐसे में उन्हें खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

इधर लगातार हो रही बारिश की वजह से जहां किसानों को धान जैसी फसलों के लिए फायदा नजर आ रहा है, वहीं बारिश के वजह से गावों में विकास कार्य ठप हो गए हैं। लगातार बारिश के कारण खेतों में ही नही कई जगह जहां विकास कार्य हो रहे हैं,वहां भी जलभराव हो गया है। ऐसे में मनरेगा कार्य प्रभावित हैं। गांव में तालाब खुदाई, मेडबंदी, पौधरोपण, नाला सफाई आदि के काम चल रहे हैं। जिससे ग्राम पंचायतों में जॉबकार्ड धारकों को रोजगार मिल रहा है।

इधर बारिश के कारण मनरेगा के ज्यादातर काम ठप पडे हैं। ऐसे में यह मजदूर भी बेरोजगार हो गए हैं। मनरेगा उपायुक्त राघवेन्द्र तिवारी की माने तो बारिश के पहले तक करीब 31 हजार मनरेगा मजदूरों को काम मिलता था, लेकिन बारिश के कारण अब यह आंकड़ा 24 हजार में सिमट गया है। करीब 7 हजार मजदूर बेरोजगार हो गए हैं।

जिले में 151 000 सक्रिय मजदूर हैं। इन जॉबकार्ड धारकों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। कोरोना काल के चलते तमाम मजदूर महानगरों से भी काम न मिलने के कारण वापस गांव आ गए हैं। यहां काम काज करके जीवनयापन कर रहे हैं। लेकिन इस समय बारिश ने रोजगार बंद कर दिए हैं।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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