- विनोद मिश्रा
बांदा। जिले में मानसून रूठ जाने से अब नहरें भी “दगाबाजी” की तैयारी में हैं। किसान खरीफ फसलों के लिए बुआई को परेशान हैं। मेघा पानी दे-पानी दे की उसकी “रट ” पर मेघों को भी तरस नहीं आ रहा।

दूसरी औऱ नहरों का आलम यह है की पानी की रफ्तार उनमें भी थम रही है।जुलाई के प्रथम सप्ताह में केन नहरों में पानी मध्य प्रदेश स्थित बरियारपुर वियर से पानी छोड़ा गया था,लेकिन एमपी की घाटियों में बारिश थमने से वियर में पानी कम होता जा रहा है। इससे नहरों में भी पानी घटा है। इस समय केन की मुख्य नहर 630 क्यूसेक क्षमता से चल रही है।

जबकि इसकी अधिकतम क्षमता 2500 क्यूसेक की है। इसी तरह अतर्रा व बांदा ब्रांच में भी पानी काफी कम चल रहा है। केन नहर मुख्य ब्रांच से अतर्रा ब्रांच को 585 क्यूसेक व बांदा ब्रांच को 157 क्यूसेक पानी जा रहा है। अतर्रा नहर की अधिकतम क्षमता 1545 क्यूसेक व बांदा नहर की अधिकतम क्षमता 675 क्यूसेक है।

जबकि पिछले दिनों जब नहर में पानी छोड़ा गया था उस समय मुख्य शाखा में 1050 क्यूसेक अतर्रा में 741 क्यूसेक व बांदा शाखा में 244 क्यूसेक क्षमता से पानी चलाया गया था। जो अब घट गया है। केन नहर प्रखंड के अधिशाषी अभियंता अरविंद पांडे ने बताया कि अभी 15 दिनों के लिए पानी है। यदि आगे बारिश नहीं हुई तो नहरों का संचालन प्रभावित होगा।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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