
- विनोद मिश्रा
बांदा। बुंदेलखंड में किसान अब “उमा से लव” करेंगे। भूल-बिसरी यादें फिर ताजी होकर प्रेम के इजहार में “आई लव यू” करेंगी। दरअसल यहां के किसानों का जो प्रेम आलसी उत्पादन को लेकर था वह अब वर्तमान में “आई लव यू नहीं” बोल रहा लेकिन अब किसान “प्रेम पुजारी” बनेंगे। वह अपनें खेतों में उमा प्रजाति की अलसी लहलहायेंगें।

बांदा जिले की जमीन को इस प्रजाति के लिए “विशेष मुफीद” बताया गया है। मटौंध में इसका सर्वे भी हो चुका है। जिले के 12 गांवों में इसका प्रदर्शन किया गया है। इसकी मानीटरिंग इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा की जा रही है। कृषि विवि के तहत भी अलसी की नई प्रजाति का प्रदर्शन किया जा रहा है।

उमा प्रजाति की अलसी कम पानी व खाद में पैदा की जा सकती है। 15-20 वर्ष पूर्व यहां अलसी की खेती व्यापक स्तर पर होती थी, लेकिन वर्तमान में इसकी जगह मटर, मसूर व सरसों आदि फसलों ने ले ली है। किसानों को अलसी फसल का दायरा बढ़ाने की नसीहत दी जा रही है।
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