
- विनोद मिश्रा
बांदा। केंद्र सरकार के सख्त प्रतिबंध के बाद भी ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी का धंधा बंद नहीं हुआ। वित्तीय लेनदेन करने वाले गेमिंग एप्स पर रोक लगाई गई थी, लेकिन सट्टेबाजों ने अब इसे साइबर दुनिया में नया ठिकाना बना लिया है। बांदा समेत आसपास के जिलों में हर महीने करीब 100 करोड़ रुपये का दांव खेला जा रहा है। सरकार के “प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट 2025” के बाद कई एप बैन किए गए थे, मगर वास्तविकता यह है कि ऐसे एप अब भी धड़ल्ले से डाउनलोड किए जा रहे हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और वेबसाइट्स पर इनके विज्ञापन खुलेआम चल रहे हैं।

ये एप सट्टेबाजी और हार-जीत के खेल के रूप में लोगों को फंसाते हैं। शुरुआत में खिलाड़ियों को आसान जीत दिलाई जाती है ताकि उनका भरोसा और लालच बढ़े। एक बार जब यूजर बड़ी रकम लगाने लगता है, तो उसे लगातार हराया जाता है। उसकी रकम धीरे-धीरे हड़प ली जाती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कई लोग अपनी हारी रकम वापस पाने की कोशिश में कर्ज में डूब जाते हैं। कुछ नाबालिग खिलाड़ी मानसिक दबाव में आत्मघाती कदम तक उठा चुके हैं।

सूत्रों के मुताबिक, बांदा जिले में ही दो दर्जन से अधिक स्थानीय स्तर के गेमिंग प्लेटफॉर्म सक्रिय हैं। इनमें क्रिकेट सट्टा, ऑनलाइन बेटिंग, लॉटरी और क्विज़ गेम के नाम पर पैसे का लेनदेन किया जा रहा है। इन एप्स पर रजिस्ट्रेशन करने के बाद खिलाड़ियों से केवाईसी और बैंक डिटेल ली जाती है, जिससे पूरे नेटवर्क का नियंत्रण दुबई में बैठे सरगना के पास पहुंच जाता है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस साइबर सट्टा गैंग का मास्टरमाइंड दुबई में बैठा है। भारत में उससे जुड़े एजेंट और लोकल ऑपरेटर गेमिंग प्लेटफार्म चला रहे हैं। हर महीने होने वाले करोड़ों रुपये के ट्रांजेक्शन का हिस्सा क्रिप्टो करेंसी और विदेशी खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन गेमिंग एप्स का प्रचार टेलीग्राम चैनल और सोशल मीडिया फीड्स में किया जा रहा है। “जीतो लाखों रुपये”, “रोजाना कैश ट्रांसफर”, “एक गेम में बदलो किस्मत” जैसे लुभावने वादों से युवाओं को फंसाया जा रहा है। एसपी पलाश बंसल ने बताया कि जिले में ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग एप के जरिए वित्तीय अपराधों को लेकर साइबर क्राइम सेल को सक्रिय है। उन्होंने कहा ऐसे सभी एप्स और प्लेटफॉर्म पर निगरानी रखी जा रही है।
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