City News Uttar Pradesh
बांदा बना अफसरशाही का 'लूट मॉडल': योजनाओं की हकीकत ढेर ! सिस्टम बेलगाम !
उत्तर प्रदेश

बांदा बना अफसरशाही का ‘लूट मॉडल’: योजनाओं की हकीकत ढेर ! सिस्टम बेलगाम !

विनोद कुमार मिश्रा ( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )

  • विनोद मिश्रा

बांदा। बांदा ज़िला अब “कामधेनु” बन चुका है, लेकिन जनता के लिए नहीं,बल्कि अधिकारियों और अफसरशाही के लिए ! यहां एक “कहावत मशहूर हो गई है “पहले कोई अफसर आना नहीं चाहता, और जो आ गया वह जाना नहीं चाहता।” वजह साफ है यहां संसाधन हैं, बजट है, योजनाएं हैं, लेकिन उन पर नजर रखने वाला कोई नहीं। यहां भ्रष्टाचार एक ऐसा “खामोश मगर सुसंगठित तंत्र” बन चुका है, जिसकी “जड़ें हर विभाग में गहरे उतर” चुकी हैं। चाहे वृक्षों की नीलामी हो या तालाबों का जीर्णोद्धार, हर योजना, हर काम अब लूट के दस्तावेज़ में तब्दील हो चुका है। बांदा से चिल्ला (40 किमी), तिंदवारी (24 किमी), बबेरू (38 किमी), और महोबा (54 किमी) तक सड़कें फैली हैं। इन सड़कों पर करीब 10 वर्ष पहले चौड़ीकरण के नाम पर हज़ारों पेड़ विशेषकर शीशम, नीम और चिल्ला के काट दिए गए थे।

बांदा बना अफसरशाही का 'लूट मॉडल': योजनाओं की हकीकत ढेर ! सिस्टम बेलगाम !

लेकिन वह लाखों कीमती पेड़ आखिर गए कहां ?क्या वाकई कोई नीलामी हुई ? नीलामी हुई तो उसका पैसा कहां गया ? अगर बजट था, तो वृक्षारोपण क्यों नहीं हुआ ? इन मार्गों पर दस साल में एक भी पेड़ क्यों नहीं खड़ा हो सका ? हकीकत यह है कि आज इन सड़कों के किनारे एक भी वृक्ष नजर नहीं आता, सिवाय उन गिने-चुने झाड़ियों के जो खुद-ब-खुद उग आए हैं। यह पूरी कहानी एक “संवेदनहीन प्रशासन और भ्रष्ट अफसरशाही की पोल” खोलती है। यहां जिले के प्रत्येक गांव में परंपरागत तालाब हैं,जो जल संरक्षण, सिंचाई, मत्स्य पालन और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा रहे हैं, लेकिन आज 97% तालाब या तो कीचड़ में तब्दील हो चुके हैं या क्रिकेट खेलने के मैदान बन गए हैं।

बांदा बना अफसरशाही का 'लूट मॉडल': योजनाओं की हकीकत ढेर ! सिस्टम बेलगाम !

जब सरकार हर साल करोड़ों रुपये तालाबों की सफाई और पुनर्जीवन के नाम पर आवंटित करती है, तो प्रश्न उठता है पैसा कहां गया ? काम किसने किया? किसने जांचा ? तालाब क्यों सूख गए जबकि बारिश हर साल होती है ? कई गांवों में तो “पुनर्जीवित तालाब” सिर्फ फाइलों और फोटोशॉप की तस्वीरों तक ही सीमित हैं। इस जिले की जनता इतनी भोली है कि कभी नहीं पूछा “हमारे पेड़ कौन ले गया ? “हमारे तालाब किसने मिटा दिए ?” अधिकांश पत्रकार आर्थिक तंगी, विज्ञापन न मिलने और राजनीतिक दबाव में हैं। आरटीआई कार्यकर्ता सीमित जानकारी और डर के कारण गूंगे हो चुके हैं। समाजसेवी अफसरों के बगल में फोटो खिंचवाने को ही ‘सेवा’ समझ बैठे हैं। इन हालातों में “अधिकारी बेलगाम हैं। न किसी से डरते हैं, न किसी को जवाब” देते हैं।

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 
Subscribe to us on Youtube to watch the latest video news updates.

Notice: This report has been updated by City News Uttar Pradesh , . Full responsibility for the content of this report rests with City News Uttar Pradesh . Neither www.citynewsuttarpradesh.in nor the Editorial Board bears any responsibility.

Related News

वन विभाग की माफियाओं से दुरभिसंधि ? पेड़ों की बेधड़क हो रही अवैध कटान

आजादी के 75 वर्ष और महिलाएं : पुस्तक का जिलाधिकारी ने किया विमोचन, कहा- छात्राओं के लिए है प्रेरक

बसपा प्रत्याशी मयंक द्विवेदी मत हासिल करनें में प्रदेश में बनाया कीर्तमान

City News Uttar Pradesh

बुलडोजर के नीचे ‘दबा’ सिस्टम: चार मंजिला इमारत ढही, जिम्मेदारी से अफसरों नें झाड़ा पल्ला !

City News Uttar Pradesh

पूर्व कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम का विवादित बयान: जो मोदी के साथ खड़े नहीं होंगे, वो देशद्रोही कहलाएंगे

अवधेश राय हत्याकांड: माफिया मुख्तार अंसारी की नहीं हो सकी ऑनलाइन पेशी, अब 20 से शुरू होगी बहस पर सुनवाई

ब्रेकिंग न्यूज़