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October 14, 2026
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बुलडोज़र का फिर बरपा कहर : प्रशासन की दोहरी नीति उजागर !
उत्तर प्रदेश

बुलडोज़र का फिर बरपा कहर : प्रशासन की दोहरी नीति उजागर !

विनोद कुमार मिश्रा ( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )

  • विनोद मिश्रा

बांदा। गर्मी की तपिश में जलते हुए आम नागरिकों के लिए एक और कहर बरपा है ‘प्रशासन का बुलडोजर अभियान’। सड़क चौड़ीकरण के नाम पर स्वराज कालोनी इलाक़े में चलाए गए ‘अतिक्रमण हटाओ’ अभियान ने लोगों की सांसे रोक दी हैं।

बुलडोज़र का फिर बरपा कहर : प्रशासन की दोहरी नीति उजागर !

प्रशासन की दो दिन की खामोशी के बाद फिर एक बार अतिक्रमण हटाओ मुहिम ने शहर के स्वराज कालोनी इलाके को दहला दिया है। बुलडोजर की गर्जना के बीच कई मकानों के सामने के हिस्से ध्वस्त कर दिए गए, बिजली काट दी गई और लोगों को उमस भरे मौसम में बेहाल कर दिया गया।

बुलडोज़र का फिर बरपा कहर : प्रशासन की दोहरी नीति उजागर !

लेकिन इस बार जनता के बीच सवाल खड़े हो गए हैं कि क्या यह अभियान निष्पक्ष है या इसमें भेदभाव बरता जा रहा है ? पुलिस लाइन तिराहा से केवटरा पेट्रोल पंप तक सड़क चौड़ीकरण के नाम पर जो अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई, उसमें सरकारी जमीन पर बने अवैध मकानों को पूरी तरह नहीं हटाया गया ! जबकि निजी मकानों को भारी नुकसान पहुंचाया गया।

बुलडोज़र का फिर बरपा कहर : प्रशासन की दोहरी नीति उजागर !

“एफसीआई गोदाम की बाउंड्री सीमा से सटी सरकारी जमीन पर बने मकानों पर प्रशासन की नरमी ने लोगों के मन में शक” पैदा कर दिया है ! इतना ही नहीं, इस अभियान में पीएम आवास योजना के तहत बने मकानों को भी बुलडोजर नें छेड़ा है। जिससे यह सवाल उठता है कि आखिर सरकारी जमीन पर पीएम आवास निर्माण को कैसे मंजूरी मिली ?

बुलडोज़र का फिर बरपा कहर : प्रशासन की दोहरी नीति उजागर !

स्थानीय निवासी इस कार्रवाई को प्रशासन की मनमानी और भ्रष्टाचार का प्रतिबिंब मान रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि अमीर और प्रशासनिक लोगों के संरक्षण में बड़े अतिक्रमणकारी सुरक्षित हैं जबकि गरीब जनता के घरों को निशाना बनाया जा रहा है। एक बुजुर्ग महिला ने कहा, “हम गरीबों को तोड़ कर रास्ता बनाया जा रहा है, लेकिन बड़े लोग सुरक्षित” हैं। ये न्याय नहीं, अन्याय है।

बुलडोज़र का फिर बरपा कहर : प्रशासन की दोहरी नीति उजागर !

आधे दिन तक चले अभियान के दौरान प्रशासन ने बिजली काट दी, जिससे अस्पतालों में मरीजों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उमस भरे मौसम में सड़कों पर पड़े लोग प्रशासन की इस बेरुखी से नाराज हैं। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह अभियान वाकई जनता के हित में है या फिर प्रशासन की दबंगई है ? बांदा के लोग अब प्रशासन से पारदर्शिता, निष्पक्षता और समयबद्ध समाधान की मांग कर रहे हैं।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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