- शरद मिश्रा
बांदा। डीएम नगेंद्र प्रताप ने लापरवाही पर कड़ा रुख अपना रहे है। अमृत योजना से स्वीकृत छाबी तालाब के सुंदरीकरण में खासी अनियमितताएं की जा रही हैं। तालाब को थोड़ा बहुत खोदने के बाद अधूरा ही छोड़ दिया गया। डीएम ने सीएनडीएस के एक्सईएन से स्पष्टीकरण मांगा है। शहर के बीच स्थित छाबी तालाब का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है। यहां पर सावन मास में कजरी मेला लगता है। अक्टूबर माह में प्रागी तालाब रामलीला के निषाद राज का मंचन भी यहीं होता है। रख-रखाव के अभाव में तालाब सिर्फ कूड़ादान बनकर रह गया था। 1994 में शासन ने इसके सुंदरीकरण के लिए 19 लाख दिए।

कार्यदायी संस्था ने नाम का तालाब खोदकर गुणवत्ता विहीन बाउंड्रीवाल बनाकर इतिश्री कर दी। कुछ ही दिन में बाउंड्रीवाल टूट गई और तालाब कूड़ादान के साथ ही गंदा गड्ढा बन गया। 2004 में इसके सुंदरीकरण में छह लाख खर्च किए गए। कार्यदायी संस्था ने महज भीटा किनारे मंदिरों व घाटों की मरम्मत कराई। अब शासन ने इस तालाब को अमृत योजना में शामिल कर करीब तीन करोड़ का बजट जारी किया है। निर्माण का दायित्व उत्तर प्रदेश जल निगम को सौंपी गई है। कार्यदायी संस्था ने थोड़ी बहुत तालाब की खुदाई कराई है और काम को रोक दिया है। बारिश का इंतजार किया जा रहा है ताकि तालाब की खुदाई में गड़बड़ झाला किया जा सके। जब यह प्रकरण डीएम नगेंद्र प्रताप प्रताप के सज्ञान में आने पर उन्होंने कार्यदायी संस्था से स्पष्टीकरण मांगा है।
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