- विनोद मिश्रा
बांदा। जिले के आंगनबाड़ी केंद्र “बेमकसद से बनकर” रह गये हैं।यहां हालात यह गीत सा सार्थक कर रहे हैं की “मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम” है। कुपोषण से बचाने के लिए चलाई जा रही योजना गंभीर भ्रष्टाचार की शिकार है ! हालते दास्तां यह है की कहीं आंगनबाड़ी केंद्रों में ताले लटक रहे हैं तो कहीं जानवरों का डेरा है। लाभार्थियों को मिलने वाला पुष्टाहार दुकानों में बिक रहा है। अधिकारियों को इसकी कोई जानकारी है।

नरैनी ब्लाक के दर्जनों आंगनबाड़ी केंद्रों में ताले लटक रहे हैं। कई केंद्र जुआरियों अड्डा बन गए हैं तो कहीं जानवर बांधे जा रहे हैं। इतना ही नहीं केंद्रों से लाभार्थियों को मिलने वाली राशन सामग्री सीधे दुकानों में बिक रही हैं। “अतर्रा ग्रामीण के सबदा पुरवा का आंगनबाड़ी केंद्र” कई वर्षों से लापता है। यहां तैनात आंगनबाड़ी नें तीन साल से केंद्र खोला ही नहीं। गांव के भरोसीलाल बताते हैं कि आंगनबाड़ी के पति ग्राम प्रधान हैं। रसूख के चलते आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कभी झांकने नहीं आतीं। पुष्टाहार वितरण तो बहुत दूर की बात है। राजेश बताते हैं कि गांव में 10 धात्री व 4 गर्भवती महिलाएं और 30 बच्चे हैं। परंतु इन्हें कभी राशन सामग्री नहीं मिलता।आंगनबाडी केंद्र वकीलन पुरवा का भी यही हाल है।

यहां आंगनबाड़ी भी सेंटर नहीं आतीं। सहायिका कभी-कभी सेंटर खोल देती हैं। गांव के छोटेलाल, धर्मराज बताते हैं की यहां राशन आदि का वितरण नहीं होता है। गांव तक संपर्क मार्ग न होने के कारण अधिकारी कभी यहां नहीं आते। इसीतरह महोतरा ग्राम पंचायत के निराला पुरवा आंगनबाड़ी केंद्र में जानवर बंधे रहते हैं। गांव के रामासरे का कहना है कि यह केंद्र सालों से बंद है। शिकायत करने पर फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी देती हैं। उसरा पुरवा का आंगनबाड़ी केंद्र गांव के मिनी सचिवालय में संचलित है। दरबाजे टूटे हैंं। इसके चलते जुआरियों ने इसे जुएं का अड्डा बना लिया है। राजाराम चौरिहा पुरवा में भी केंद्र की कमोवेश यही स्थिति है।

विद्याधाम समिति के मंत्री राजा भाइया बताते हैं कि आंगनबाड़ी केंद्रों को सुबह 8 से दोपहर 12 बजे तक नियमित खोलने के आदेश हैं। इसके बाद भी अधिकतर केंद्र बंद पड़े हैं। इन केंद्रों में मिलने वाली सुविधाएं पात्रों को नहीं मिला पा रही हैं। ऐसे केंद्रों की जांच कराकर दायित्वों का निर्वहन न करने वाली आगनबाड़ी कार्यकत्रियो के खिलाफ कठोर कार्यवाई की जानी चाहिये।
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