- विनोद मिश्रा
बांदा। होली रंगों का त्योहार है। जगह-जगह होली का खुमार भी चढ़ने लगा है। यूपी में काशी और मथुरा की होली दुनियाभर में प्रसिद्ध है। वहीं, बांदा की अनोखी होली किसी से कम नहीं होती थी। यहां जमकर हुड़दंग मचाया जाता था।इससे नाराज लोगों को खुश करने के लिए मुंह मांगी बख्शीश देते थे।तो आइये जानते हैं यादों के झरोखों से बांदा की अनोखी होली की कहानी।

बांदा में होली का 5 दिनों तक मनाई जाती थी।पहले दिन होलिका दहन होते ही हुड़दंग शुरू हो जाता था। इस दिन गांव के लंबरदार (काश्तकार) मरे मवेशियों की हड्डी, मल मूत्र और गंदा पानी लेकर चोरी से अपने यहां (चौहाई) मजदूरी करने वाले मजदूर के घर में फेक आते थे। सुबह मजदूर अपने घर में गंदगी देखकर उसे समेट कर डलिया में भरकर उसी लंबरदार के घर में फेंक देते थे और भद्दी भद्दी गालियां भी देते थे। इसके बाद मजदूर गंदगी को तभी साफ करते थे जब लंबरदार द्वारा उन्हें मुंह मांगी बख्शीश देते थे। इसी को होली का हुड़दंग कहा जाता है। लोगों ने बताया कि कई बार लंबरदार हुड़दंग की बख्शीश के रूप में जमीन तक दान में दे देते थे। खास बात यह है कि यह जमीन कभी वापस नहीं मांगते थे। इस पर मजदूर के परिवार का ही कब्जा रहता था। यह सब अब बीते जमाने की बात हो गई है।
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