- विनोद मिश्रा
बांदा। सूखे से कराहते बुंदेलखंड में वैसे तो किसानों की आय दोगुनी करने को सरकार कई स्तर पर प्रयास कर रही है। इसमें अब एक नया अध्याय स्ट्राबेरी का जुड़ने जा रहा है। बुंदेलखंड में स्थानीय बागवानी को प्रमुखता देने के साथ ही कृषि विश्वविद्यालय ने इसकी खेती की शुरुआत कर दी है। ताकि आने वाले समय में किसानों के खेतों तक इसे पहुंचाया जा सके।

दलहन-तिलहन के लिए मुफीद बुंदेली माटी मोटे अनाजों की पैदावार के लिए भी प्रचलित है। बदलते समय के साथ खेती का तरीका भी काफी बदल चुका है। बुंदेलखंड में पानी संकट को देखते हुए कम सिचाई वाली फसलों पर जोर है। इसी के बीच ठंडे क्षेत्रों में पैदा होने वाली स्ट्राबेरी को यहां स्थान देने की तैयारी शुरू हो चुकी है। प्रदेश के इतिहास में पहली बार स्ट्राबेरी महोत्सव आयोजित हो रहा है। हालांकि बुंदेलखंड इसकी खेती से अछूता रहा है। लेकिन यहां कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने इसकी शुरुआत कर दी है। फिलहाल एक बीघे से भी कम रकबे में इसकी खेती की गई है। हिमांचल प्रदेश से इसके रनर (पौध) मंगाकर इन्हें लगाया गया है। हालांकि अभी बुंदेलखंड के किसानों के बीच खेती के रूप में यह नहीं पहुंची। लेकिन विश्वविद्यालय का कहना है कि उनके यहां इसकी खेती की शुरुआत कर दी गई है। जल्द ही इसे बुंदेली किसानी में शामिल कराया जाएगा।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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