- विनोद मिश्रा
बांदा। पीसीएफ “किसानों को आर्थिक रूप से पेरे” है। उनके “2 करोड़ 35 लाख के भुगतान पर कुंडली मारे बैठा” है। ढाई माह से “माल के दाम के लिये किसान सिसक” रहें हैं। आपको बता दें की पीसीएफ नें दलहन और तिलहन खरीद करने के बाद किसानों का 2.35 करोड़ रुपये का भुगतान लटकाये है।

मंडल के चारों जिलों में 30 जून तक खरीद हुई, लेकिन ढाई माह बाद भी किसानों का भुगतान नहीं मिला। हालत यह है की दलहन एवं तिलहन बेच चुके 2311 किसान भुगतान के लिए पीसीएफ की डेहरी पर माथा टेक रहें हैं। लेकिन “आश्वासनों की चाशनी देकर यूगो” कर दिया जता है। अधिकारियों का कहना है कि जब नैफेड लखनऊ से धनराशि आएगी तभी भुगतान खातों में भेजा जाएगा।

शासन ने मंडल में समर्थन मूल्य योजना के तहत दलहन-तिलहन खरीद के लिए 15 केंद्र खोले थे। इसमें 11 केंद्र पीसीएफ के और चार केंद्र यूपीपीसीयू के शामिल हैं। पीसीएफ ने 3196 किसानों से 6251.450 मीट्रिक टन चना, 958 किसानों से 1571.700 मीट्रिक टन मसूर और 2894 किसानों से 6805.550 मीट्रिक टन सरसों की खरीद की। खरीद की यह प्रक्रिया 30 जून तक चली। शासन से चना का समर्थन मूल्य 53,350 रुपये, मसूर का 60,000 और सरसों का 54,500 रुपये प्रति मीट्रिक टन निर्धारित किया था।

केंद्र प्रभारियों ने खरीद तो पूरी कर ली, लेकिन भुगतान का पेंच फंस गया। चना बेचने वाले 41 किसानों का 36 लाख 42 हजार रुपये अभी तक नहीं दिया गया। जबकि मसूर खरीद में 98 किसानों का 79.63 लाख रुपये बकाया है। वहीं सरसों की खरीद में 92 किसानों का एक करोड़ 19 लाख 43 हजार रुपये की बकाया है। किसानों पर यह लटकाऊ भुगतान उनकी आर्थिक तंगी का सबब बन गया है।
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