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खेत तालाब योजना बन गई "मुंगेरी लाल का हसीन सपना" ! आयुक्त के निर्देश हो रहे ढ़ेर ?
उत्तर प्रदेश

खेत तालाब योजना बन गई “मुंगेरी लाल का हसीन सपना” ! आयुक्त के निर्देश हो रहे ढ़ेर ?

  • विनोद मिश्रा

बांदा। खेत तालाब योजना विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते परवान नहीं चढ़ पा रही। हालत यह है कि ज्यों -ज्यों दवा कि मर्ज बढ़ता ही गया। किसानों की हालत मुंगेरी लाल के सपनों की सी हो गई है। इस पर तुर्रा यह कि जल संचय में कुछ कथित शासन तक जुगाड़ लगा अपने को “जल योद्धा” तमगे से नवाज “स्वंय अपनी पीठ थपथपाते” हैं औऱ “दूसरों से थपवाते” भी हैं। खैर मूल खबर पर आते हैं। “खेत तालाब योजना” योगी सरकार की “मुख्य योजनाओं में से एक है”। लेकिन यह “विभागीय लापरवाही” एवं “कथित कमाई की” शिकार हो “बंटाधार” है। खेतों में न लक्ष्य के अनुरूप तालाब हैं और न ही उनमें जलधारा का कहीं भराव औऱ प्रवाह दिखता हैं !

खेत तालाब योजना बन गई "मुंगेरी लाल का हसीन सपना" ! आयुक्त के निर्देश हो रहे ढ़ेर ?
The farm pond scheme has become a “beautiful dream of Mungeri Lal”! Commissioner’s instructions are getting piled up?

मंडलायुक्त आर.पी सिंह नें इस “गड़बड़ झाला” को अपनी “प्रशानिक कुशलता की नजरों’ से परखा। इस संदर्भ में उन्होंने 18 नवंबर को खेत तालाब योजना की समीक्षा भी की थी। इसमें धीमी प्रगति पर संबंधित अधिकारियों से नाराजगी भी जताई थी। तालाबों की खुदाई का कार्य युद्ध स्तर पर किये जानें के निर्देश दिये । जिससे अधिक से अधिक तालाब शीघ्र तैयार हो सकें। आपको बता दूँ कि मंडल में 5100 तालाबों के खुदाई का लक्ष्य है।

खेत तालाब योजना बन गई "मुंगेरी लाल का हसीन सपना" ! आयुक्त के निर्देश हो रहे ढ़ेर ?
The farm pond scheme has become a “beautiful dream of Mungeri Lal”! Commissioner’s instructions are getting piled up?

आयुक्त ने यह भी अधिकारियों को समझाया था कि खेत-तालाब योजना बुन्देलखण्ड के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। इससे किसानों की आमदनी बढेगी। तालाब खुदाई के कार्य की प्रत्येक दिन समीक्षा एवं योजना के अन्तर्गत अपेक्षित प्रगति लाने के निर्देश मण्डल के भूमि संरक्षण अधिकारियों को दिये थे। पर “आयुक्त के निर्देश हवा -हवाई साबित हुये” हैं। निर्देशों के मुताबिक “मिशन मोड पर कार्य” करते हुए जिन तालाबों में खुदाई का कार्य हो रहा है, वह भी “गतिवान” नहीं हैं औऱ न ही उनके शीघ्र पूर्ण होने की उम्मीदें हैं।

जिन किसानों ने योजना के अन्तर्गत पंजीकरण कराया है उनके खेत लेन -देन के चक्कर में खाली हैं, इस कारण खुदाई का कार्य प्रारम्भ नहीं हो पा रहे। सरकारी आकड़ों में योजना के तहत मण्डल में 1680 तालाब खुद चुके हैं, पर स्थलीय निरीक्षण हो तो नजारा “धत्ततेरे” की नजर आयेगा। योजना में उदासीनता होने से किसान का तालाबों का निर्माण कर मत्स्य पालन एवं आय बढ़ाने का सपना तो फिलहाल “मुंगेरी लाल के सपने बयां कर रहा” है।

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

 

 
 



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