City News Uttar Pradesh
डीएम दीपा साहिबा जिले में आयुष्मान का क्यों है दुर्भाग्य ? खुल गया राज, जानिये आप
उत्तर प्रदेश

डीएम दीपा साहिबा जिले में आयुष्मान का क्यों है दुर्भाग्य ? खुल गया राज, जानिये आप

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिले में “आयुष्मान” कार्ड योजना की गति क्यों फिसड्डी है, उसका रहस्य खुल गया है। हालांकि डीएम दीपा की तत्परता से योजना का ग्राफ “डी” श्रेणी से एक पायदान उछल कर “सी” श्रेणी में आ गया है लेकिन “इस उछाल में” लक्ष्य के अनुरूप प्रगति “आसमां से तारे तोड़ने जैसी” है।

डीएम दीपा साहिबा जिले में आयुष्मान का क्यों है दुर्भाग्य ? खुल गया राज, जानिये आप
Why is Ayushman’s misfortune in DM Deepa Sahiba district? The secret has been revealed, you know

डीएम दीपा रंजन की जानकारी के लिये “धीमी प्रगति के रहस्य के कारणों से पर्दा उठाते हैं”। जिन कर्मचारियों पर जिम्मेदारी है वह गैर जिम्मेदारी का काम कर रहें हैं। जबरिया के नियम पंचायत सेवक बता देते हैं। जैसे पात्रता के लिये एक आईडी जरूरी हैं चाहे आधार कार्ड हो या पेन कार्ड, ड्राइविंग लाईसेंस आदि। लेकिन इस कार्ड को बनाने के लिये गरीबी रेखा का राशन कार्ड या श्रम कार्यालय में श्रमिक पंजीयन कार्ड आदि मांगे जाते हैं साथ हीं सुविधा शुल्क के रूप में धन भी ऐंठने की बल्ले -बल्ले हैं! सोचनीय बात यह हैं कि जिले में सत्तर प्रतिशत वास्तविक गरीबों के बीपीएल कार्ड हीं नहीं बनें हैं इन कार्डों से धनी लोग ही लाभान्वित हैं।

डीएम दीपा साहिबा जिले में आयुष्मान का क्यों है दुर्भाग्य ? खुल गया राज, जानिये आप
Why is Ayushman’s misfortune in DM Deepa Sahiba district? The secret has been revealed, you know

श्रम कार्यालय में पंजीयन मजदूर कैसे कराये ,जो मौका लगाकर दो चार बार ग्रामीण क्षेत्रों से आये भी तो उन्हें निराश लौटना पड़ा। जबकि यदि गरीबी का प्रमाण को अनिवार्य बनाना हैं तो तहसील का आय प्रमाण पत्र को स्वीकार कर आयुष्मान कार्ड बना देना चाहिये। लेकिन जब कार्ड बनाने के जिम्मेदरो की मंशा ही शासन के मंसूबे पूरा करने की नहीं हैं तो यही कहावत चरितार्थ होगी कि “सूरदास प्रभु काली कमरी चढ़े न दूजो रंग” इसी कारण जिले में यह “योजना लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ने की बजाय हांफ” रही है। नरैनी तहसील क्षेत्र पुकारी इलाके में आयुष्मान का कार्ड बना रहे युवक रिशु का कहना है श्रम कार्यालय में लापरवाही की हद है। आनलाइन के लिये साइड भी नहीं खुलती। कार्य में तेजी क्या खाक आयेगी।


“डीएम साहिबा को लक्ष्य धीमा होने का रहस्य हमने बता दिया”। यदि वह पहचान पत्र के साथ “बीपीएल कार्ड एवं श्रमिक प्रमाण” कार्ड की जगह “आय प्रमाण पत्र लें लें” तो फिर देखें “फौरन लक्ष्य प्राप्त होगा”। वैसे भी आयुष्मान कार्ड की वेब साइड पर बीपीएल कार्ड या श्रमिक कार्ड की अनिवार्यता का कोई उल्लेख नहीं है। एक आश्चर्य जनक खुलासा औऱ है कि जिले में 25 प्रतिशत जो आयुष्मान कार्ड बनें हैं यदि उन लाभार्थियों की डोर टू डोर जांच करा ली जायें तो मुश्किल से पांच प्रतिशत ही पात्रों के कार्ड बनाये गये हैं बाकी सभी माध्यम वर्गीय एवं कुछ धनाड्य भी मिलेंगे जिनके आयुष्मान कार्ड “पैसा फ़ेंको तमाशा देखो की तर्ज” पर बना दिये गये हैं। ऐसे लाभार्थियों के पास ट्रेक्टर, कार, मोटर साइकिलें औऱ पक्के मकान भी हैं।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

 

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 
Subscribe to us on Youtube to watch the latest video news updates.

Notice: This report has been updated by City News Uttar Pradesh , . Full responsibility for the content of this report rests with City News Uttar Pradesh . Neither www.citynewsuttarpradesh.in nor the Editorial Board bears any responsibility.

Related News

सड़क हादसों को रोकने के लिए ओवरलोड वाहनों पर करें कार्रवाई : आयुक्त दिनेश सिंह

City News Uttar Pradesh

आकांक्षा बाजपेई का हुआ जिला श्रम अधिकारी पद पर चयन, बांदा जिलें का नाम किया रोशन

City News Uttar Pradesh

Election 2022 : पांच राज्यों में चुनावों की घोषणा, दस मार्च को मतगणना

होली पर मिलावट का बाजार, सिस्टम लाचार: त्योहार की मिठास में खुलेआम बिक रहा जहर

City News Uttar Pradesh

सबको शिक्षा व समानता का मिले अधिकारः बाबू सिंह कुशवाहा

City News Uttar Pradesh

जुड़वा मासूम भाइयों में एक का अपहरण, बांदा के युवक ने दिया था घटना को अंजाम …

ब्रेकिंग न्यूज़