- ( ब्यूरो रिपोर्ट )
लखनऊ। उत्तर प्रदेश “भाजपा का नया अध्यक्ष कौन होगा” ? विधानसभा चुनाव के कुछ दिन बाद से ही यह प्रश्न संगठन में अटकलों की नित नई कहानी गढ़ रहा है। कई नाम अब तक दावेदारों के रूप में प्रमुख रूप से चल चुके हैं, लेकिन अभी तक घोषणा नहीं हो सकी है।

माना यही जा रहा है कि निर्णय जातीय समीकरणों की बुनाई में फंसा हुआ है। मंथन चल रहा है कि ब्राह्मण, दलित और पिछड़े में किस वर्ग से अध्यक्ष बनाया जाए। इस बीच बुधवार को पिछड़ा वर्ग से जाट नेता के रूप में पंचायतीराज मंत्री भूपेंद्र चौधरी का नाम अचानक सुर्खियों में आ गया। विधानसभा चुनाव में भाजपा की शानदार जीत के बाद प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह को योगी सरकार 2.0 में जलशक्ति मंत्री बना दिया गया। एक तो स्वतंत्रदेव का कार्यकाल पूरा हो गया और दूसरा पार्टी में एक व्यक्ति एक पद का सिद्धांत होने के नाते भी नए अध्यक्ष की नियुक्ति की जानी है।

चूंकि, 2024 में लोकसभा चुनाव होने हैं और उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 80 लोकसभा सीटें हैं, इसलिए पार्टी इस राज्य में अध्यक्ष की तैनाती को लेकर भी गहन मंथन कर रही है। स्पष्ट है कि प्रदेश अध्यक्ष से जातीय समीकरण भी साधने के प्रयास होंगे।
वर्तमान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का नाम चर्चाओं में है कि उन्हें दोबारा संगठन की बागडोर सौंपी जा सकती है तो अटकलें स्वतंत्रदेव सिंह का कार्यकाल बढ़ाए जाने की भी हैं।

इधर, नवनियुक्त प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने मंगलवार को कार्यभार संभाल लिया। उसके बाद से चर्चा तेज हो गई कि बुधवार या गुरुवार को नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा हो जाएगी। इसी बीच इंटरनेट मीडिया पर बुधवार को वायरल हो गया कि आजमगढ़ प्रवास पर पहुंचे योगी सरकार के मंत्री भूपेंद्र चौधरी को अचानक दिल्ली बुला लिया गया है। वह अध्यक्ष बनाए जा सकते हैं। इसके पीछे दलील है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद सांसद हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृहक्षेत्र गोरखपुर इसी अंचल में है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी पूर्वी उत्तर प्रदेश से हैं। ऐसे में पश्चिम को साधने के साथ ही सपा-रालोद के गठजोड़ वाली जाट सियासत को बेअसर करने के लिए पार्टी जाट को प्रदेश संगठन का सिरमौर बना सकती है।

– कौन है भूपेंद्र चौधरी
भूपेंद्र सिंह चौधरी की पहचान जाट नेता के रूप में होती है। भूपेंद्र चौधरी की जाट बिरादरी और पश्चिमी यूपी में मजबूत पकड़ है। भूपेंद्र सिंह की पकड़ का ही नतीजा रहा कि यूपी के पिछले चुनाव में बीजेपी ने भले ही पूर्वांचल में उम्मीद के अनुसार सफलता नहीं हासिल की लेकिन पश्चिमी यूपी मे किसान आंदोलन के बाद भी शानदार जीत मिली थी। इस जीत का भूपेंद्र चौधरी को इनाम भी मिला।
योगी-2.0 में भूपेंद्र चौधरी को यूपी में दूसरी बार मंत्री बनाया गया। इससे पहले उन्होंने संगठन में लंबे समय तक काम किया है। क्षेत्रीय अध्यक्ष तक की जिम्मेदारी निभाई है। पश्चिमी यूपी के मुरादाबाद की कांठ विधानसभा सीट जाट लैंड के रूप में भी जाना जाता है। भूपेंद्र चौधरी इसी जाट लैंड के रहने वाले हैं। भूपेंद्र चौधरी 1999 में सपा संस्थापक मुलायम सिंह के खिलाफ लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। लोकसभा चुनाव में हार के बाद भी बीजेपी ने भूपेंद्र चौधरी पर पूरा भरोसा रखा।
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