- विनोद मिश्रा
बांदा। भाजपा एवं जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी जीतू ने देश कानून मंत्री को पत्र भेजा है। मांग की है कि देश में मेडिकल और इंजीनियरिंग की भांति कानून की पढ़ाई करने वालों के लिए भी एक देश एक परीक्षा की तर्ज पर नेशनल लॉ ऐडमिशन टेस्ट के माध्यम से विश्वविद्यालयों की सीटों को काउंसलिंग के आधार पर भरा जाए।

पूर्व जिला अध्यक्ष त्रिपाठी ने बताया कि वर्तमान समय में इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद ऐसे विद्यार्थी जिन्हें कानून की पढ़ाई करनी है इसके लिए यूनिवर्सिटी राज्य अधीन और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के माध्यम से अलग-अलग प्रवेश परीक्षाएं कराती हैं।अलग-अलग शुल्क देकर आवेदन करना पड़ता है। ठीक इसी प्रकार गैर शासकीय विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों को आर्थिक, मानसिक, शारीरिक, परेशानी होती है।

पूर्व अध्यक्ष त्रिपाठी ने देश के कानून मंत्री किरन रीजूजू को भेजे पत्र में उल्लेख किया है कि एक देश एक परीक्षा की तर्ज पर पंचवर्षीय ला कोर्स के लिए वर्तमान में चली आ रही पुरानी व्यवस्थाओं को प्रतिबंधित करते हुए नए तरीके से राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा एजेंसी के माध्यम से नेशनल लॉ ऐडमिशन टेस्ट कराया जाए और एडमीशन हो।

अशोक त्रिपाठी जीतू ने पत्र की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान, विश्व विद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष एम. जगदीश कुमार और अध्यक्ष बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भी भेजा है। पंचवर्षीय ला कोर्स के लिए वर्तमान में चली आ रही विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं को प्रतिबंधित करते हुए एक देश एक परीक्षा की तर्ज पर राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा के माध्यम से कानून की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए प्रवेश परीक्षा की जरूरत बताई है।
![Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh](https://citynewsuttarpradesh.in/wp-content/uploads/2026/05/file_0000000055a072089a09490a85573f53-683x1024.png)
![Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh](https://citynewsuttarpradesh.in/wp-content/uploads/2026/05/file_00000000022872078732ec3f33441b29.png)
Notice: This report has been updated by City News Uttar Pradesh , . Full responsibility for the content of this report rests with City News Uttar Pradesh . Neither www.citynewsuttarpradesh.in nor the Editorial Board bears any responsibility.
