- विनोद मिश्रा
बांदा। दुधारू पशु दूध में कंगाल हो गये है और उनपर मौत नें भी कसा शिकंजा कस दिया है। पशुपालक हायराम – हायराम कह रहे है।

मंडल में 48 डिग्री तापमान की गर्मी झेल रहे 18 लाख से अधिक गोवंश व महिषवंशीय पशुओं की जान जोखिम में है। इनकी सहनशक्ति 38 डिग्री तक है। ऐसे में इन बेजुबानों की खुराक घटकर आधी रह गई है और दूध उत्पादन मात्र एक चौथाई बचा है। अपने दुधारू और कीमती पशुओं पर पड़ रही इस मौसम की मार से पशु पालक भी बेचैन हैं।

वर्तमान में 44 डिग्री की तपिश से यह लाखों दुधारू पशु इन्हीं परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। हरा चारा और भूसा भी बमुश्किल आधा खा रहे हैं। कई स्थानों और खासकर गोशालाओं में धान का सूखा पुआल परोसा जा रहा है। यह खुद भी गरम होता है। गोशालाओं में खुले आसमान तले लू-धूप सह रहे मवेशियों को पर्याप्त पानी की भी व्यवस्था नहीं है।

मनोज अवस्थी, उप निदेशक ( पशुपालन ) ने कहा कि मौजूदा तापमान से पशुओं को बचाना जरूरी है, अन्यथा पशु हीट स्ट्रोक का शिकार होकर दम तोड़ सकते हैं। हीट स्ट्रोक हो जाने पर तत्काल एक लीटर पानी में 250 ग्राम शीतल पाउडर व हीट स्ट्रोक बैक की टेबलेट देनी चाहिए।
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