- विनोद मिश्रा
बांदा। जिले में दुलर्भ प्रजाति के काले हिरन की संख्या घट रही है। एक दशक पहले यहां काले हिरनों की संख्या करीब 1368 थी,जो वर्ष 2019 की वन्य जीव गणना में 259 रह गई। वैसे हिरन की प्रजाति के अन्य हिरनों को मिलाकर कुल संख्या 977 हो गई है। वन विभाग ने इनकी निगरानी के लिए कई टीमें बना दी हैं। एक दशक पहले तक गांवों के आसपास काले हिरनों का झुंड नजर आता था, जो अब कम ही दिखता है।

जिले में दुलर्भ प्रजाति के काले हिरन तिन्दवारी, पैलानी, नौगवां, करतल, बहादुरपुर, स्योढा, रामपुर, कालिंजर आदि इलाकों में पाए जाते हैं। वन विभाग के आंकड़ों में डेढ़ साल पहले सड़क हादसे में एक घायल हिरन की मौत हुई थी। इसके अलावा दो दिन पूर्व शिकार का मामला सामने आया ।

पैलानी क्षेत्र में पहले बड़ी संख्या में काले हिरन नजर आते थे। अब तो कभी कभार दिखते हैं। हिरनों और अन्य दुर्लभ जीव-जंतुओं में आ रही कमी का मुख्य कारण पलायन है। हिरन की एक अन्य प्रजाति चिंकारा पूरे जिले में मात्र 236 है।

डीएफओ ने बताया कि काले हिरनों सहित अन्य प्रजाति के हिरनों की वर्ष 2016 में कुल संख्या 818 रही। इसमें काले हिरन 210 थे। इनकी संख्या घटने का कारण हिरनों का पलायन करने वाला स्वभाव और शिकार भी है।
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