- विनोद मिश्रा
बांदा। जिले में “हरा सोना” यानी हरियाली के लिये पौध रोपण का महाभियान फिर रविवार को आकड़ों में जमकर झूमाऔर लुटा!पौध रोपण की तस्वीरें खिंचवाकर पर्यावरण की हरियाली का मसीहा दिखाने की कोशिशे की गई। यह नजारे फेसबुक में खूब वायरल किये गये।जबकि हकीकत हतप्रभ करने वाली है, फिर भी शासन-प्रशासन पर खामोशी का “मास्क” लगा हुआ है।

हकीकत का आईना देखेगे तो बुंदेलखंड का खासकर चित्रकूट धाम बांदा मंडल पौधरोपण के नाम परआकड़ों का ऐतिहासिक इतिहास रच “ठहाके” लगा रहा है।प्रदेश में सरकारे आने-जाने का सिलसिला चलता रहा, लेकिन सरकारों का रोल “सूरदास” और “मौनी बाबा” का रहा। यही सिल-सिला अब भी बदस्तूर जारी है!यहां पौध रोपण के नाम पर घोटाले सरकारी बजट की लूट खसोट का सिलसिला पुराना है। बसपा, सपा, भाजपा सरकारों में पेड़ों के नाम पर जेबें भरने का धंधा पनपा। जांचों में लीपापोती हुई। कई नजीरें ऐसी भी हैं कि जिन्होंने घोटाला किया उन्हीं को जांच सौंप दी। चित्रकूट जनपद उसका उदाहरण है। यहां हाल ही में यह मुद्दा भी उठा कि शासन के निर्देशों की अनदेखी करके पेटी ठेकेदार को भुगतान कर दिया गया।

सरकारी आंकड़ों की बाजीगरी में चित्रकूटधाम मंडल में दो वर्षों के पौधरोपण में एक परिवार पर 45 पौधों का औसत है। जनगणना के मुताबिक, मंडल के चारों जिलों बांदा, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट में 8 लाख 51 हजार 493 परिवार हैं। पौधरोपण 3.90 करोड़ से ज्यादा हो रहा है। मंडल में आबादी का घनत्व औसत 317 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। दो वर्ष के पौधरोपण के आंकड़ों के अनुसार, एक वर्ग किलोमीटर में आबाद 317 लोगों के बीच 2638 पौधे लगाए गए हैं।

बुंदेलखंड में पिछले 10 वर्षों में घोटाले की दलीलों के साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट भी दायर है। इसमें शासन, वन विभाग के बड़े अफसरों को पार्टी बनाया गया है। रिट में कहा गया कि वर्ष 2011-12 में सीएजी की आडिट रिपोर्ट में बुंदेलखंड में पौधरोपण में लगभग 40 करोड़ रुपये की गड़बड़ी उजागर हुई है।

आप लोगों को यह जानकर भी आश्चर्य होगा की गिनीज बुक वाले पौधरोपण में घास का जंगल है। यह पोल खोलने के लिए बांदा का राजकीय मेडिकल कॉलेज परिसर पर्याप्त है। वर्ष 2016 में यहां एक घंटे में पांच हजार पौधे रोपे गए थे। जोरशोर से इसका प्रचार भी किया गया था। इसे गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज कर लिया गया था। इसके बाद किसी ने सुध नहीं ली। यहां पर रोपे गए पौधे भी नष्ट हो गए। सिर्फ अब जंगली घास बची है।आखिर पौधरोपण में यह नौटंकी क्यों ? और क्यों है हरे सोने की लूट में खामोशी ? जो सोचने को मजबूर कर देती है की कुछ न कुछ तो टाप टू बाटम गड़बड़ झाला है !

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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