24 C
Lucknow
October 12, 2026
City News Uttar Pradesh
बांदा में 6 करोड़ का महाघोटाला: डीएम का जांच आदेश सात माह से दफन !
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंड

बांदा में 6 करोड़ का महाघोटाला: डीएम का जांच आदेश सात माह से दफन !

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। यह कोई “छोटा-मोटा घपला” नहीं, यह 6 करोड़ का “संगठित महाघोटाला” है। जिसे “जांच के आदेश के सात माह बाद” भी प्रशासन ने “पूरी बेशर्मी से फाइलों में दफन” कर दिया है। बिसंडा ब्लॉक में “विकास” के नाम पर हुई इस “लूट” ने पंचायतीराज व्यवस्था की पूरी “पोल खोल” दी है, लेकिन “कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा” है। यह “सन्नाटा चीख-चीख” कर “मिलीभगत की कहानी” कह रहा है।बांदा में 6 करोड़ का महाघोटाला: डीएम का जांच आदेश सात माह से दफन !सबसे शर्मनाक तथ्य यह है कि जिन “मजदूरों के पसीने से विकास” होना था, उन्हीं की “मजदूरी के 2 करोड़ रुपये से अधिक सीधे एक सप्लायर के खाते में डाल” दिए गए। नियम कहता है, पैसा मजदूर के “जनधन खाते” में जाएगा, लेकिन यहां “पैसा ठेकेदार की तिजोरी” में चला गया।मनरेगा की "सत्यनारायण कथा" जिले में नहीं चल पा रही "सत्य" पर !एक ही “मजदूर के नाम पर कई बार भुगतान दिखाकर फर्जी मस्टररोल” भरे गए। यह “सीधे-सीधे मनरेगा और पंचायत अधिनियम की हत्या” है। दो साल में “एक ही सप्लायर को 6 करोड़ से अधिक का भुगतान” किया गया, न टेंडर प्रक्रिया और न कोई कार्ययोजना ही बनीं थी। यह बिना बीडीओ, एडीओ पंचायत और जिला पंचायत राज अधिकारी की मिलीभगत के असंभव है ?बांदा में 6 करोड़ का महाघोटाला: डीएम का जांच आदेश सात माह से दफन !घोटालेबाजों ने ई-ग्राम स्वराज जैसे सरकारी पोर्टल को भी नहीं बख्शा। 2022-23 और 2023-24 में जब राहुल द्विवेदी प्रभारी बीडीओ थे ही नहीं, तब भी “उनके नाम पर फर्जी बोर्ड बैठकों की तारीखें पोर्टल पर चढ़ा” दी गईं। जिन वर्षों में कोई बैठक हुई ही नहीं, वहां “कार्ययोजना के नाम पर सादे कागज अपलोड” कर दिए गए। जिन कामों के टेंडर निकले,उनका कार्ययोजना में उल्लेख तक नहीं है।बांदा में 6 करोड़ का महाघोटाला: डीएम का जांच आदेश सात माह से दफन !तत्कालीन डीएम जे.रीभा ने “मामले की गंभीरता” को समझते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी को “तीन सदस्यीय कमेटी” बनाकर “गहन जांच और दोषियों पर तत्काल कार्रवाई” के निर्देश दिए थे। “सात माह बीत” गए। न कमेटी की रिपोर्ट आई, न किसी पर एफआईआर हुई ! प्रश्न सीधा है, जिला प्रशासन से है कि “क्या जांच समिति बनी भी या सिर्फ कागजों पर बनाकर मामले को ठंडा” किया गया ! क्या “सप्लायर और अधिकारियों के बीच हुई बंदरबांट” में “बड़े साहबों का भी हिस्सा” है, जो “जांच को बर्फ” बनाने पर तुले हैं। जब तक इस “घोटाले की फाइल नहीं खुलेगी, तब तक विकास के नाम पर चिंघाड़ रहा यह भ्रष्टाचार यूँ ही मजदूरों का खून चूसता” रहेगा।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 
Subscribe to us on Youtube to watch the latest video news updates.

Notice: This report has been updated by City News Uttar Pradesh Desk, . Full responsibility for the content of this report rests with City News Uttar Pradesh Desk. Neither www.citynewsuttarpradesh.in nor the Editorial Board bears any responsibility.

Related News

मीटर रीडरों की ‘कमाई’ पर ‘कंपनी’ की कैंची ? नौकरी की ‘धमकी’ के पीछे क्या है ‘पूरा खेल’?

City News Uttar Pradesh Desk

कब्र से उठेगा सच या दबेगा जुर्म: नाबालिग की मौत बनी मिस्ट्री, पोस्टमार्टम से खुलेगा राज

City News Uttar Pradesh

बांदा सदर में प्रकाश ‘विपक्ष’ की बनें चिंता: द्विवेदी का जलवा कायम, विरोधियों के समीकरण फेल !

City News Uttar Pradesh Desk

योगी बोले सपा का ‘डीएनए’ ही ‘परिवारवाद औऱ लूट’: राम से नफरत, बाबर से मोहब्बत

City News Uttar Pradesh Desk

बुंदेलखंड में विलुप्ति से लौटे ‘प्रकृति के प्रहरी’: पन्ना टाइगर रिजर्व में बढ़ी ‘गिद्धों’ की आबादी

सौभाग्य योजना बन गई दुर्भाग्य : कायम हो गया अंधेरे का साम्राज्य

City News Uttar Pradesh
ब्रेकिंग न्यूज़