City News Uttar Pradesh
आंगनबाड़ी घोटाला: ताले में बंद केंद्र, बाजार में बिक रहा पोषण! बच्चों का हक डकार रहे जिम्मेदार !
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंड

आंगनबाड़ी घोटाला: ताले में बंद केंद्र, बाजार में बिक रहा पोषण! बच्चों का हक डकार रहे जिम्मेदार !

शरद मिश्रा सम्पादक सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • शरद मिश्रा

बांदा। कुपोषण मुक्त भारत” का दावा करने वाले जिले में आंगनबाड़ी योजना पूरी तरह फ्लॉप हो गई है ! सरकारी इमारतें या तो बंद हैं, या जानवरों-जुआरियों के कब्जे में। और गर्भवती, धात्री व बच्चों का पोषण सीधे दुकानों में बिक रहा है। नरैनी ब्लॉक के हालात सबसे शर्मनाक हैं। यहां दर्जनों केंद्रों पर सालों से ताला लटक रहा है, पर वेतन और राशन की निकासी लगातार हो रही है। अतर्रा ग्रामीण के सबदा पुरवा का केंद्र 3 साल से बंद पड़ा है। आंगनबाड़ी के पति ग्राम प्रधान हैं और इसी रसूख के चलते मैडम कभी केंद्र झांकने नहीं आतीं। गांव में 10 धात्री, 4 गर्भवती और 30 बच्चे हैं, लेकिन किसी को आज तक राशन नहीं मिला। ग्रामीण भरोसीलाल का कहना है कि “मैडम का दर्शन तक नहीं हुआ”

आंगनबाड़ी घोटाला: ताले में बंद केंद्र, बाजार में बिक रहा पोषण! बच्चों का हक डकार रहे जिम्मेदार !वकीलन पुरवा में भी यही तस्वीर है। आंगनबाड़ी कभी नहीं आती। सहायिका कभी-कभी आकर ताला खोल देती है। संपर्क मार्ग न होने के कारण अधिकारी भी कभी गांव तक नहीं पहुंचते। ग्रामीण छोटेलाल और धर्मराज बताते हैं कि यहां वितरण के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूरी होती है। महोतरा के निराला पुरवा केंद्र में तो हद हो गई। यहां सालों से जानवर बंधते हैं। ग्रामीण रामासरे ने बताया कि शिकायत करने पर फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी जाती है। उसरा पुरवा का केंद्र मिनी सचिवालय में चलता है जिसके दरवाजे टूटे हैं। नतीजतन जुआरियों ने इसे अपना अड्डा बना लिया है। राजाराम चौरिहा पुरवा की स्थिति भी इससे अलग नहीं है।

आंगनबाड़ी घोटाला: ताले में बंद केंद्र, बाजार में बिक रहा पोषण! बच्चों का हक डकार रहे जिम्मेदार !नियम के मुताबिक सभी केंद्रों को सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक खुला रहना चाहिए और हर लाभार्थी को पोषण मिलना चाहिए। लेकिन हकीकत इसके उलट है। ज्यादातर केंद्रों में सालों से ताला लटका है और पोषण सामग्री सीधे बाजार में बिक रही है। अब प्रशासन से सीधे 3 सवाल हैं। किसकी शह पर राशन बाजार में बिक रहा है? 3 साल से बंद केंद्रों का वेतन और पोषण कौन डकार रहा है?और रसूखदार ग्राम प्रधानों के दबाव में अधिकारी जांच से क्यों बच रहे हैं? स्थानीय लोगों की मांग है कि जिले के सभी बंद और भ्रष्ट आंगनबाड़ी केंद्रों की 7 दिन के अंदर जांच कराई जाए। दायित्वों का निर्वहन न करने वाली कार्यकत्रियों और मिलीभगत करने वाले अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई हो। वरना कुपोषण से होने वाली हर मौत की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 
Subscribe to us on Youtube to watch the latest video news updates.

Notice: This report has been updated by City News Uttar Pradesh Desk, . Full responsibility for the content of this report rests with City News Uttar Pradesh Desk. Neither www.citynewsuttarpradesh.in nor the Editorial Board bears any responsibility.

Related News

Banda : सदर विधायक प्रकाश ने जड़ा नहले पर दहला, पूरा होगा अब बाई पास ! …

जलशक्ति मंत्री रामकेश निषाद नें बांदा -लखनऊ नई बस सेवा का किया शुभारंभ

हैवानियत की पराकाष्ठा : बूढ़ी मां तड़पती रही-छटपटाती रही और कलयुगी बेटे ने दी दर्दनाक मौत, पुलिस हत्यारें की तलाश में जुटी

City News Uttar Pradesh

Banda : पोस्ट कोविड सेंटर से भाजपा चिकित्सकीय सहायता में जुटी …

Russia Ukraine War : बांदा, महोबा, इटावा और हमीरपुर समेत आसपास जिलों के कई छात्र फंसे, फोन पर परिवार को बता रहे वहा के हालात

City News Uttar Pradesh

पूर्व विधायक दलजीत सिंह मीडिया से बोले : नरेंद्र मोदी सरकार के नौ साल देश के लिये बेमिसाल

ब्रेकिंग न्यूज़