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बुंदेलखंड के सांसदों की 'अग्नि परी'क्षा: क्या गूंजेगी 'पृथक राज्य' की मांग या रहेंगे 'खामोश' ?
उत्तर प्रदेश

बुंदेलखंड के सांसदों की ‘अग्नि परीक्षा’: क्या गूंजेगी ‘पृथक राज्य’ की मांग या रहेंगे ‘खामोश’ ?

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। संसद का सत्र शुरू होते ही “बुंदेलखंड में एक बार फिर अलग राज्य” की “मांग” को लेकर “सियासी हलचल तेज” हो गई है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या बुंदेलखंड से चुने गए “सांसद संसद में इस मुद्दे को पूरी ताकत” से उठाएंगे या “एक बार फिर यह मांग केवल चुनावी मंचों और जनसभाओं तक ही सीमित” रह जाएगी। क्षेत्र की जनता इस बार अपने जनप्रतिनिधियों के रुख पर “पैनी नजर” बनाए हुए है।

बुंदेलखंड के सांसदों की 'अग्नि परी'क्षा: क्या गूंजेगी 'पृथक राज्य' की मांग या रहेंगे 'खामोश' ?

बुंदेलखंड लंबे समय से विकास के मामले में पिछड़े क्षेत्रों में गिना जाता है। पानी की भीषण समस्या, बेरोजगारी, पलायन, सूखा और कृषि संकट जैसी समस्याओं से जूझ रहे इस क्षेत्र के लोग वर्षों से अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग उठाते आ रहे हैं। सामाजिक संगठनों और क्षेत्रीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि यदि बुंदेलखंड को अलग राज्य का दर्जा मिल जाए तो प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी और विकास कार्यों को नई गति मिलेगी।

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हालांकि, जब चुनाव का समय आता है तो कई नेता और सांसद मंचों से बुंदेलखंड के विकास और अलग राज्य की मांग पर बड़ी-बड़ी बातें करते दिखाई देते हैं। लेकिन जैसे ही बात संसद की आती है, यह मुद्दा अक्सर “हाशिये” पर चला जाता है। यही वजह है कि अब क्षेत्र की जनता सांसदों की नीयत और उनकी प्रतिबद्धता पर सवाल उठाने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बुंदेलखंड के सभी सांसद एकजुट होकर संसद में इस मुद्दे को मजबूती से उठाएं तो यह राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। लेकिन अब तक ऐसा शायद ही कभी देखने को मिला है।

बुंदेलखंड के सांसदों की 'अग्नि परी'क्षा: क्या गूंजेगी 'पृथक राज्य' की मांग या रहेंगे 'खामोश' ?

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि संसद का यह सत्र बुंदेलखंड के सांसदों के लिए एक “बड़ी परीक्षा” साबित हो सकता है। यदि वे इस बार एकजुट होकर अलग राज्य की मांग को सदन में रखते हैं तो यह बुंदेलखंड की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। वहीं यदि इस बार भी यह मुद्दा संसद में जोरदार तरीके से नहीं उठता है तो क्षेत्र की जनता के बीच निराशा और आक्रोश बढ़ सकता है।

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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