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पंचायत चुनाव 'धड़का' रहा दिल : मतदाता सूची देरी से सियासी सरगर्मी
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पंचायत चुनाव ‘धड़का’ रहा दिल : मतदाता सूची देरी से सियासी सरगर्मी

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में “त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव” को लेकर चल रही तैयारियों के बीच एक बार फिर “समयसीमा बढ़ाए” जाने से “राजनीतिक हलकों में हलचल औऱ धड़कन तेज” हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने “अंतिम मतदाता सूची जारी” करने की तिथि 15 अप्रैल 2026 कर दी है। पहले यह सूची 28 मार्च को जारी होनी थी। यह दूसरी बार है जब “आयोग ने समय सीमा बढ़ाई” है। राज्य निर्वाचन आयुक्त के द्वारा आदेश के बाद लगभग स्पष्ट हो गया है कि अप्रैल माह में पंचायत चुनाव कराना संभव नहीं होगा।

पंचायत चुनाव 'धड़का' रहा दिल : मतदाता सूची देरी से सियासी सरगर्मी

इससे संभावित प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ गई है और गांवों में चुनावी चर्चाएं “नए मोड़” पर पहुंच गई हैं। आयोग के अनुसार मतदाता सूची का पूर्ण कंप्यूटरीकरण, राज्य मतदाता संख्या जारी करना तथा मतदान स्थलों की मैपिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य निर्धारित समय में पूरे नहीं हो सके। पहले इन प्रक्रियाओं को 27 मार्च तक पूरा किया जाना था, लेकिन अब 13 अप्रैल तक की मोहलत दी गई है।

पंचायत चुनाव 'धड़का' रहा दिल : मतदाता सूची देरी से सियासी सरगर्मी

इसके अतिरिक्त विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण में देरी, बोर्ड परीक्षाओं के चलते प्रशासनिक व्यस्तता, बीएलओ पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां और दावे-आपत्तियों के निस्तारण में आई बाधाएं भी प्रमुख कारण हैं। ग्राम पंचायत प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। यदि अंतिम मतदाता सूची 15 अप्रैल को जारी होती है, तो उसके बाद आरक्षण निर्धारण, अधिसूचना, नामांकन, नाम वापसी, प्रचार और मतदान की पूरी प्रक्रिया एक महीने के भीतर संपन्न कराना चुनौतीपूर्ण होगा। सबसे बड़ी बाधा ओबीसी आरक्षण को लेकर सामने आ रही है। इसके लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन अभी तक प्रारंभ नहीं हुआ है। यह प्रक्रिया समयसाध्य मानी जा रही है।

पंचायत चुनाव 'धड़का' रहा दिल : मतदाता सूची देरी से सियासी सरगर्मी

पंचायत चुनाव ग्रामीण राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। गांवों में संभावित प्रत्याशी महीनों से जनसंपर्क, बैठकों और सामाजिक समीकरणों को साधने में जुटे थे। कई स्थानों पर प्रचार सामग्री भी तैयार हो चुकी थी। अब तिथि आगे बढ़ने से चुनावी रणनीति पर पुनर्विचार की स्थिति बन गई है। संभावित उम्मीदवारों का कहना है कि अनिश्चितता के कारण आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर दबाव बढ़ रहा है। यदि 26 मई तक चुनाव संपन्न नहीं हो पाते, तो ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किए जा सकते हैं। नियमानुसार ऐसी स्थिति में छह माह के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य होगा।

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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