

- शरद मिश्रा
बांदा। जिले में इन दिनों खेतों में “लहलहाती सरसों और राई “की फसलें “माहू कीट” के भीषण हमले से “कराह” रही हैं। हालात इतने “भयावह” हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद जिले का “कृषि विभाग अब तक मूकदर्शक” बना हुआ है। न तो व्यापक सर्वे शुरू हुआ और न ही किसानों को समय रहते प्रभावी सहायता मिल सकी, जिससे किसानों में भारी रोष व्याप्त है।

जिले में सरसों और राई की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। यही फसल किसानों की “मुख्य नकदी फसल” मानी जाती है। दिसंबर माह से ही “माहू कीटों” ने फसलों पर “हमला” शुरू कर दिया था, लेकिन शुरुआती दौर में इस पर ध्यान नहीं दिया गया। अब, जब फसलें परिपक्व अवस्था में पहुंच चुकी हैं, तब माहू ने खेतों में व्यापक रूप से कब्जा जमा लिया है।

माहू कीट पौधों के फूल, पत्तियां और तना से रस चूसकर उन्हें भीतर से खोखला कर रहा है। कई इलाकों में फूल झड़ चुके हैं, फलियां कमजोर हो गई हैं और खेतों में पीली पड़ती फसलें किसानों की टूटती उम्मीदों की गवाही दे रही हैं।

किसान लाख प्रयासों के बावजूद कीट प्रकोप को रोक पाने में असमर्थ हैं। किसानों का कहना है कि सरसों की फसल से ही व पारिवारिक खर्च, बच्चों की पढ़ाई, बैंक व साहूकार का कर्ज और चुकाने की उम्मीद रखते हैं। अब फसल बर्बाद होने की स्थिति में किसानों का जीवन-चक्र पूरी तरह चरमरा सकता है।
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