
- विनोद मिश्रा
बांदा। बांदा-झांसी-इलाहाबाद स्नातक एमएलसी चुनाव में सपा प्रत्याशी मान सिंह यादव की “मुश्किलें बढ़ती’ जा रही हैं। वजह है उनका “पांच साल का लापता कार्यकाल”। चित्रकूट मंडल के बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर और महोबा में “मतदाता खुलकर” कह रहे हैं कि मान सिंह यादव सिर्फ “कागजों के एमएलसी” रहे हैं, “जमीन पर उनका एक भी काम नहीं” है।
उनका पिछला कार्यकाल तो इस “कहावत को चरितार्थ” करता है कि “तू चल मैं आता हूँ,चुपड़ी रोटी खाता हूं,ठंडा पानी पीता हूं”। मतलब “न संघर्ष, न सदन में आवाज, बस आराम से कार्यकाल काट” लिया। इतना बड़ा स्नातक क्षेत्र, जहां हजारों बेरोजगार स्नातक, शिक्षक और कर्मचारी अपनी समस्याओं से जूझ रहे हैं, वहां के “जनप्रतिनिधि ने कभी उनकी सुध नहीं” ली।
न विधान परिषद में मजबूती से मुद्दे उठाए, न जिले में आकर मतदाताओं से संवाद किया। “जनप्रतिनिधित्व का मान तो तब होता जब जनता के बीच रहते, लेकिन मान सिंह यादव ने उस मान को तार-तार” कर दिया।
अब “जब चुनाव आ गया” तो वही मान सिंह यादव “लंबी-चौड़ी हांक” रहे हैं, “बड़े-बड़े सपने दिखा” रहे हैं। लेकिन चार जिलों के स्नातक मतदाता अब “पूछ” रहे हैं कि जब पांच साल तक आपने एक ईंट तक नहीं लगाई तो अब किस मुंह से वोट मांगने आए हो? साफ है, इस बार स्नातक मतदाता दिखावे पर नहीं, काम पर वोट करेगा और मान सिंह यादव के लिए यह चुनाव सबसे कठिन होने वाला है।
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