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August 26, 2026
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किसानों का नहीं जगा रुझान : नहीं होगी "कठिया गेहूं" की "बहार" !
उत्तर प्रदेश

किसानों का नहीं जगा रुझान : नहीं होगी “कठिया गेहूं” की “बहार” !

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिले में विलुप्त हो रहा कठिया गेहूं को खेतों में लहलहायें जानें के प्रयास का दावा हवा -हवाई बनकर रह गया। निवर्तमान डीएम अनुराग की यह तमन्ना पूरी होती नहीं दिखती। दिल में ही घुट गई ,क्योंकि सार्थक प्रयास भी नहीं हुये। गेहूं बुवाई के चल रहें वर्तमान सीजन में किसानों का रुझान कठिया गेहूं के प्रति बामुश्किल दस प्रतिशत ही बताया जा रहा है। वह भी बहुत ही कम क्षेत्रफल में।

किसानों का नहीं जगा रुझान : नहीं होगी "कठिया गेहूं" की "बहार" !
Farmers have not woken up trend: there will be no “spring” of “hard wheat”!

आपको बता दें की प्रशासन नें इसके उत्पादन को बढ़ावा देने की ठानी थी। लेकिन संबंधित विभाग इसके प्रति उदासीन से है। अब लगता नहीं की मंशा औऱ लक्ष्य के अनुरूप कठिया गेहूं खेतों में लहलहा पायेगा। इसके लिये कठिया गेहूं की कार्यशाला भी आयोजित कर इसको ब्रांड नेम दिया गया था “कठिया पेट की लाल दवा”। इसके उत्पादन में बहार लाने हेतु भी भरपूर प्रयास के निर्देश थे।

किसानों का नहीं जगा रुझान : नहीं होगी "कठिया गेहूं" की "बहार" !
Farmers have not woken up trend: there will be no “spring” of “hard wheat”!

कठिया गेहूं को जिले के सभी अधिकारी खरीदें यह भी रणनीति बनी थी, जिससे किसानों को उचित मूल्य मिले और आय भी दो गुनी बढ़े। कठिया यहां का एक प्राकतिक गेंहू है, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है।इसे दोबारा जीवित करने के उद्देश्य से कार्यशाला आयोजित हुई थी। इसमें 55 किसानों और वैज्ञानिक ने भाग लिया था।भरोसा दिलाया था की हम इसे कृषि विभाग के अधिकारियों की मदद से बढ़ाने का काम कर रहे हैं। पर ऐसा कुछ प्रयास कार्यशाला के बाद नहीं सा हुआ।

किसानों का नहीं जगा रुझान : नहीं होगी "कठिया गेहूं" की "बहार" !
Farmers have not woken up trend: there will be no “spring” of “hard wheat”!

आपको बता दें कि कठिया गेंहू की खेती बुंदेलखंड में पुरानी है। इसका उपयोग बिस्किट, सूजी, दलिया, उपमा आदि के रूप में किया जाता है। साथ ही, दक्षिण भारत में लोग इसको नाश्ते के रूप में प्रयोग करते हैं।इसकी उत्पादकता प्रति बीघे 2 कुंतल से 25 कुंतल तक है. बाजार में इसकी कीमत 3,500 रु प्रति कुंतल है और करीब 135 दिन में कम पानी मे भी उगाया जा सकता है।
इसमें बहुत से औषधीय गुण हैं। इसका दलिया खाने से गैस की बीमारी,अर्थराइटिस नही होता।इसकी रोटी बहुत स्वादिष्ट होती है।इसमें भरपूर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट, विटामिन ए , फाइबर, ऑक्सीडेंट भी हैं। लेकिन अच्छा भाव न से मिलने से किसानों ने इसे बोना बंद सा कर दिया।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

 
 



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