- विनोद मिश्रा
बांदा। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए एक और पहल की गई है। अब हर माह की 24 तारीख को भी प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए ) दिवस मनाया जाएगा। इसके तहत स्वास्थ्य महकमा उच्च जोखिम गर्भावस्था वाली महिलाओं को चिन्हित करेगा। इन महिलाओं को जांच और इलाज में प्राथमिकता देने के साथ ही उनके लिए उपचार के विशेष प्रबंध भी किए जाएंगे। इसके पूर्व पीएमएसएमए दिवस प्रत्येक माह की नौ तारीख को मनाया जा रहा था। अब इसे विस्तारित किया गया है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तर प्रदेश की मिशन निदेशक अपर्णा उपाध्याय द्वारा इस बारे में जारी पत्र का हवाला देते हुए मुख्य चिकित्साअधिकारी डा. एके श्रीवास्तव ने बताया कि विभिन्न कारणों से जोखिम गर्भावस्था मातृ-शिशु की मृत्यु का कारण बनती हैं। प्रसव पूर्व छोटी-बड़ी कई कमियों का सामने नहीं आ पाना इसकी प्रमुख वजह है। गर्भवती को उच्च रक्तचाप, गंभीर रक्ताल्पता, मधुमेह, दिल की बीमारी, क्षयरोग, मलेरिया आदि की स्थिति में जोखिम बना रहता है। स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य ऐसी महिलाओं को प्रसव पूर्व ही चिन्हित कर उपचार करना होगा जिससे कि प्रसव के दौरान खतरनाक स्थिति न बने। प्रसव पूर्व जांच में ऐसी महिलाओं को चिन्हित कर सरकारी अस्पतालों में उनका उपचार किया जाएगा। अब तक प्रत्येक माह की नौ तारीख को पीएमएसएमए मनाया जा रहा था। अब इसमें और तेजी लाने के लिए मिशन निदेशक ने इसे विस्तारित करते हुए हर माह 24 तारीख को भी जनपद की एफआरयू (प्रथक संर्दभन इकाई) में यह अभियान चलाया जाएगा। इसमें द्वितीय व तृतीय त्रैमासकी गर्भवती की जांच होगी।
जिला कार्यक्रम प्रबंधक कुशल यादव ने बताया कि हर माह की नौ तारीख को जिला महिला अस्पताल सहित नौ स्वास्थ्य केंद्रों में यह आयोजन हो रहा था। अब हर माह 24 तारीख को जनपद में जिला महिला अस्पताल सहित एफआरयू नरैनी, जसपुरा, बबेरू व अतर्रा स्वास्थ्य केंद्र में यह आयोजन होगा।
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