
- विनोद मिश्रा
बांदा। आंधी-तूफान से कराह रहे चिल्ला गांव में राहत की उम्मीद जगी जब खुद जल शक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद डाक बंगले पहुंच गए। मंत्री निषाद ने कुर्सी पर बैठते ही पहला काम किया,विद्युत विभाग, जल विभाग और ग्राम पंचायत के अफसरों को तलब। दूसरा काम किया, जनता की फरियाद सुनी। तीसरा और सबसे सख्त काम किया, 24 घंटे का अल्टीमेटम ठोक दिया।
मंत्री रामकेश निषाद ने अफसरों से साफ कहा कि आंधी से टूटे खंभे खड़े करो, फुंके ट्रांसफार्मर बदलो, बंद नल खोलो। 24 घंटे में सब कुछ दुरुस्त चाहिए। “आम आदमी गर्मी और अंधेरे में तड़प रहा है,और तुम फाइलें टटोल” रहे हो। यह नहीं चलेगा। मंत्री निषाद ने चेताया कि 24 घंटे बाद अगर एक भी शिकायत मिली तो जिम्मेदारी तय होगी और कार्रवाई भी।
चिल्ला डाक बंगले में मंत्री निषाद ने खुद एक ग्रामीण की बात सुनी। किसी के घर की छत उड़ी थी, किसी के खेत में पेड़ गिरा था, कहीं पूरा मोहल्ला अंधेरे में था। मंत्री निषाद ने भरोसा दिया कि सरकार जनता के साथ खड़ी है। तबाही का दर्द मैं समझता हूं। राहत में एक मिनट की देरी भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मंत्री निषाद के साथ मंडल अध्यक्ष धर्मेंद्र गुप्ता, ग्राम प्रधान रामकिशन निषाद, मंडल प्रभारी अमित निगम, सोशल मीडिया प्रभारी शिवराम कश्यप, मीडिया प्रभारी एस.पी. निषाद समेत तमाम कार्यकर्ता मौजूद रहे। मंत्री निषाद ने संगठन को भी निर्देश दिए कि गांव गांव जाकर नुकसान का आकलन करें और पीड़ितों की मदद करें। आंधी ने बाँदा को हिलाया जरूर, पर मंत्री रामकेश निषाद के दौरे ने “अफसरशाही को दौड़ा” दिया है। अब सबकी निगाहें घड़ी पर हैं। देखना है कि मंत्री निषाद का 24 घंटे वाला फरमान जमीन पर कितनी बिजली गिराता है या फिर सिर्फ कागजों में ही करंट दौड़ता है।
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