
- शरद मिश्रा
बांदा। जेल से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने जेल प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस कैदी को सोमवार को कोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल से रिहा होना था, वह “रिहाई से पहले ही कोमा” में पहुंच गया और अब मेडिकल कॉलेज के वेंटिलेटर पर “जिंदगी और मौत के बीच जंग” लड़ रहा है। 25 वर्षीय विचाराधीन बंदी नीतीश पाल, जो पॉक्सो एक्ट के एक मामले में जिला जेल में निरुद्ध था, सोमवार को कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जेल से बाहर आने वाला था। परिजन भी उसकी रिहाई का इंतजार कर रहे थे।

लेकिन सुबह अचानक खबर मिली कि उसकी हालत गंभीर हो गई है और उसे अस्पताल ले जाया गया है। परिवार के लिए यह खबर किसी सदमे से कम नहीं थी। जिस युवक को घर लौटना था, वह कुछ ही घंटों बाद वेंटिलेटर पर पहुंच गया। जेल प्रशासन की ओर से बताया गया कि बंदी को अचानक मिर्गी जैसे दौरे पड़े और वह गिरकर अचेत हो गया। इसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। लेकिन परिजन इस दलील पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि केवल दौरे पड़ने से यह स्थिति बनी है, तो फिर बंदी की हालत इतनी गंभीर कैसे हो गई कि वह सीधे “कोमा” में पहुंच गया? यही सवाल अब पूरे मामले को “रहस्यमय” बना रहा है।

मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू अस्पताल के रिकॉर्ड और डॉक्टरों के बयानों में दिखाई दे रहा है। जिला अस्पताल के दस्तावेजों में उल्लेख है कि मरीज को इमरजेंसी में भर्ती किया गया और जीवनरक्षक दवाएं दी गईं। लेकिन बाद में संबंधित चिकित्सक ने मरीज का इलाज करने से इनकार कर दिया। वहीं दूसरी ओर ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक का कहना है कि मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे प्राथमिक उपचार के बाद तत्काल मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। एक ही मरीज और एक ही समय को लेकर सामने आए अलग-अलग बयान अब कई नए सवाल पैदा कर रहे हैं। मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है।

मेडिकल कॉलेज के रिकॉर्ड के अनुसार बंदी को पुलिसकर्मी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि जैसे ही मरीज को गंभीर अवस्था में एडवांस आईसीयू में भर्ती किया गया, उसके बाद पुलिसकर्मी अस्पताल से चले गए। यदि ऐसा हुआ है तो सवाल यह उठता है कि गंभीर हालत में भर्ती एक विचाराधीन बंदी की निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी? यह मामला अब केवल एक बीमार कैदी का नहीं रह गया है। यह जेलों में बंद कैदियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रशासनिक जवाबदेही का “बड़ा प्रश्न” बनता जा रहा है।
![Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh](https://citynewsuttarpradesh.in/wp-content/uploads/2026/05/file_0000000055a072089a09490a85573f53-683x1024.png)
![Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh](https://citynewsuttarpradesh.in/wp-content/uploads/2026/05/file_00000000022872078732ec3f33441b29.png)
Notice: This report has been updated by City News Uttar Pradesh , . Full responsibility for the content of this report rests with City News Uttar Pradesh . Neither www.citynewsuttarpradesh.in nor the Editorial Board bears any responsibility.
