– विनोद मिश्रा
बांदा। चित्रकूट मंडल में भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट जिले में आयोजित होने वाला पांच दिवसीय राष्ट्रीय रामायण मेले की शुरुवात इस बार कल 11मार्च शिवरात्रिसे होगी। इस मेले के इतिहास के झरोखों में जायें तो इसकी परिकल्पना समाजवादी चिंतक डॉ राम मनोहर लोहिया ने की थी। 1973 में शुरू हुए इस राष्ट्रीय रामायण मेले में अब तक देश के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई और अटल बिहारी बाजपेयी समेत दर्जनों केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल शिरकत कर जहां आयोजन की शोभा बढ़ाते रहे हैं। वहीं देश-विदेश से आने वाले विद्वान ने ज्ञान का प्रकाश और कलाकारों ने अपनी कला का जलवा बिखर कर समारोह को ऐतिहासिक और यादगार बनाया है।

धर्म नगरी चित्रकूट भगवान श्रीराम की तपोभूमि होने की वजह से समूचे विश्व की धार्मिक आस्था का केंद्र बिंदु है। वर्ष 1960 में समाजवादी चिंतक डॉ राममनोहर लोहिया ने धर्म नगरी चित्रकूट में राष्ट्रीय रामायण मेले के आयोजन की परिकल्पना की थी, जिसे 1973 में मानस की रचना के 400 वर्ष पूरे होने पर ’मानस चतुर्थशती समारोह’ के रूप में साकार रूप दिया गया था। उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी के संरक्षकत्व में आयोजित इस प्रथम राष्ट्रीय रामायण मेले भव्य स्वरूप देने में आयोजन समिति के अध्यक्ष जर्नादन दत्त शुक्ल (आईपीएस),कार्यकारी अध्यक्ष गोपाल करवरिया,मंत्री आचार्य बाबूलाल गर्ग का अहम योगदान था। इसके बाद से लगातार यह रामायण मेला भव्य स्वरूप लेता गया। वर्ष 1978 में आयोजित हुए पंचम राष्ट्रीय रामायण मेले का उद्घाटन स्वयं देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने किया। वहीं इस राष्ट्रीय मेले की अध्यक्षता प्रख्यात कवित्री महादेवी वर्मा ने की थी। इसके अलावा तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री राजनारायण आयोजन समिति के संरक्षक एवं स्वागताध्यक्ष के रूप में शिरकत कर कार्यक्रम को भव्यता प्रदान किये थे। इस ऐतिहासिक राष्ट्रीय रामायण मेले में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरेंद्र कुमार जहां मंच की शोभा बढ़ा रहे थे।

वहीं उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रहे चुके डॉ विष्णुकांत शास्त्री बतौर विद्वान उपस्थित रहे। इसके अलावा राष्ट्रीय रामायण मेले के 6वें महोत्सव का उदघाटन देश के पूर्व प्रधानमंत्री एवं तत्कालीन विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा किया गया था।इसके बाद दिन-प्रतिदिन राष्ट्रीय रामायण मेला भव्यता की ओर बढ़ता गया और 1991 में आयोजित राष्ट्रीय रामायण मेले का उद्घाटन देश के तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह द्वारा किया गया था। इसके बाद से अब तक लगातार इस राष्ट्रीय रामायण मेले के उदघाटन और समापन में केंद्रीय मंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्री, राज्यपाल आदि की सहभागिता बनी रहीं। वहीं राष्ट्रीय रामायण मेले के 43वें महोत्सव में केंद्रीय पर्यटन एवं सांस्कृतिक मंत्री डॉ महेश शर्मा द्वारा किया गया था। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री डॉ शर्मा द्वारा भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट के पर्यटन विकास के लिए रामायण सर्किट योजना से जोड़ने एवं राष्ट्रीय रामायण मेले को अन्तर्राष्ट्रीय रामायण मेले का स्वरूप देने की घोषणा की थी। वहीं अब 11 फरवरी से शुरू होने जा रहे 49 वें राष्ट्रीय रामायण मेले मे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ शिरकत करेंगे।

रामायण मेले के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश करवरिया और मंत्री करुणा शंकर द्विवेदी का कहना है कि चित्रकूट भगवान श्रीराम की तपोस्थली है। केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राष्ट्रीय रामायण मेले में आने से निश्चित रूप से धर्म नगरी का चहुमुखी विकास का मार्ग और तेजी से प्रशस्त होगा। साथ ही रामायण मेले को दो वर्ष पूर्व सरकार नें प्रांतीय मेला का स्वरूप दिया । अब रामायण मेले का अंतर्राष्टीय स्वरूप देने में मदद मिलेगी। समारोह में तिरुपति से डॉ आरएस त्रिपाठी, गौहाटी से देवेनचन्द्र दास, कोचीन से डॉ एनजी देवकी, हैदराबाद से डॉ वाणी कुमारी एवं शेषारत्नम खंडवा से डाॅ श्रीराम परिहार आदि रामकथा के विद्वानों के साथ रामदेव शर्मा मुजफ्फरनगर, स्वामी राजेश्वरानन्द जालौन, रघुनाथ प्रसाद नर्सिंहपुर भी मेला की शोभा बढ़ायेंगे। मेले में दिल्ली, असम, मेघायल, मणिपुर, छतरपुर आदि प्रदेशों से आधा सैकड़ा से अधिक कलाकार आकर अपनी प्रस्तुति देंगे। ब्रज कला केंद्र मथुरा की मण्डली द्वारा रामलीला और रासलीला का मंचन किया जायेगा।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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