
- विनोद मिश्रा
बांदा। जिले में ‘बिजली आपूर्ति पूरी तरह लड़खड़ा’ चुकी है। मई की तपती दोपहरें और उमस भरी रातें लोगों का ‘जीना मुहाल’ कर चुकी हैं, लेकिन ‘बिजली विभाग की आंखें अब भी बंद’ हैं। ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं, लाइनें फेल हो रही हैं, और आम जनता घंटों “अंधेरे में तड़प” रही है। विभागीय “अफसरों की लापरवाही एवं भ्रष्ट नीति नें बिजली तंत्र को मज़ाक” बना दिया है।

वहीं विभागीय अफसर “लोड और ‘लाइन फाल्ट की घिसी-पिटी स्क्रिप्ट” दोहराने में मशगूल हैं। हालत यह है कि तेज़ गर्मी और बढ़े हुए लोड के चलते “दर्जनों ट्रांसफार्मर धू-धू कर फुंक” चुके हैं। पीलीकोठी, सर्वोदय नगर, केवटरा, कटरा, स्टेशन रोड जैसे प्रमुख इलाकों में लोग लगातार 6–8 घंटे की कटौती झेल रहे हैं। “लाइन फाल्ट अब समस्या नहीं, सिस्टम का हिस्सा” बन चुका है ! सब-स्टेशन के कर्मचारियों के पास न संसाधन हैं,न समाधान। अधिकारी ‘निर्माण कार्य’ और ‘लोड शिफ्टिंग’ का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लेते हैं।

सरकार और बिजली विभाग ने सालों से करोड़ों रुपये के बजट और योजनाओं का ढिंढोरा पीटा। लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि बिजली व्यवस्था उसी जगह खड़ी है, जहां सालों पहले थी ‘बेहाल और बदहाल’। सहायक अभियंता से लेकर अधिशासी अभियंता तक सबके पास एक ही जवाब “लोड ज्यादा है, तापमान अधिक, ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं, लाइन फाल्ट आ रहे हैं।” मगर कोई ठोस समाधान नहीं।
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