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बांदा भाजपा जिलाध्यक्ष पद पर सियासी घमासान: 20 से अधिक नेताओं ने "ठोकी ताल", पार्टी में बढ़ी खींचतान
उत्तर प्रदेश

भाजपा जिलाध्यक्ष पद पर सियासी घमासान: 20 से अधिक नेताओं ने “ठोकी ताल”, पार्टी में बढ़ी खींचतान

विनोद कुमार मिश्रा ( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )

  • विनोद मिश्रा

बांदा। भाजपा जिलाध्यक्ष पद के लिए सियासी घमासान अपने चरम पर पहुंच गया है। पार्टी के इस पद को लेकर लगभग 20 से अधिक नेता दावेदारी पेश कर चुके हैं, जिनमें कई ऐसे नाम भी शामिल हैं, जो पहले भी जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। वर्तमान में यह पद एक बार फिर सुर्खियों में है, क्योंकि पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया चल रही है और चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। भाजपा नेताओं के मुताबिक, 9 जनवरी को नामांकन की प्रक्रिया पूरी होगी और इसके बाद स्पष्ट होगा कि कौन इस पद का नया चेहरा बनेगा।

बांदा भाजपा जिलाध्यक्ष पद पर सियासी घमासान: 20 से अधिक नेताओं ने "ठोकी ताल", पार्टी में बढ़ी खींचतान

इन दावेदारों में प्रमुख नामों में बबेरू के चेयरमैन विवेकानंद गुप्ता, पूर्व जिलाध्यक्ष बाल मुकुंद शुक्ला, मौजूदा जिलाध्यक्ष संजय सिंह, जिला उपाध्यक्ष अखिलेशनाथ दीक्षित, प्रेमनारायण द्विवेदी, डॉ. धर्मेंद्र त्रिपाठी, कल्लू राजपूत, डॉ. आनंद गुप्ता, विजय बहादुर सिंह परिहार, अजीत गुप्ता जैसे नेताओं का नाम शामिल है। इसके अलावा, महिला पदाधिकारियों में ममता मिश्रा और वंदना गुप्ता का भी नाम सामने आया है, जिन्होंने दावेदारी पेश की है।

बांदा भाजपा जिलाध्यक्ष पद पर सियासी घमासान: 20 से अधिक नेताओं ने "ठोकी ताल", पार्टी में बढ़ी खींचतान

भाजपा के दावेदारों में हर वर्ग के नेता अपनी ताकत दिखा रहे हैं। ठाकुर, ब्राह्मण, वैश्य, कुशवाहा, प्रजापति और अन्य समुदायों के नेताओं ने अपने-अपने पक्ष में वोटों की लामबंदी करना शुरू कर दिया है। इस कड़ी में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि दावेदारों को उनकी नीतियों, कार्यशैली और क्षेत्र में उनकी पकड़ के आधार पर विचार किया जाएगा। पार्टी के वरिष्ठ नेता बताते हैं कि भाजपा में जिलाध्यक्ष का पद आमतौर पर संघ से जुड़े नेताओं को सौंपा जाता है, क्योंकि संघ का प्रभाव पार्टी के हर स्तर पर होता है।

बांदा भाजपा जिलाध्यक्ष पद पर सियासी घमासान: 20 से अधिक नेताओं ने "ठोकी ताल", पार्टी में बढ़ी खींचतान

हाल ही में, भाजपा के जिलाध्यक्ष संजय सिंह को महज 15 महीनों तक इस पद पर रहने का मौका मिला। संजय सिंह ने रामकेश निषाद के राज्यमंत्री बनने के बाद यह जिम्मेदारी संभाली थी। लेकिन अब एक बार फिर जिलाध्यक्ष चुनने का वक्त आया है। पार्टी ने इस बार आवेदन मंगवाए हैं और अब तक 20 से ज्यादा नेताओं ने अपना बायोडाटा चुनाव अधिकारी को सौंप दिया है। नामांकन के बाद पार्टी एकराय बनाने की कोशिश करेगी, ताकि चुनाव की आवश्यकता न पड़े। 9 जनवरी को नामांकन के बाद यह साफ हो जाएगा कि किसे इस पद पर मौका मिलेगा और पार्टी किसे नेतृत्व सौंपेगी। भाजपा के दिग्गज नेताओं का कहना है कि चुनाव की संभावना कम है, लेकिन अगर चुनाव होते हैं, तो वह पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला होगा।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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