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August 28, 2026
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बांदा में 'बेटियों' की 'शिक्षा को पंख': दो नए स्कूल शुरू, आठ सौ छात्राओं को मिलेगा आवासीय लाभ
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंड

बांदा में ‘बेटियों’ की ‘शिक्षा को पंख’: दो नए स्कूल शुरू, आठ सौ छात्राओं को मिलेगा आवासीय लाभ

शरद मिश्रा सम्पादक सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • शरद मिश्रा

बांदा। जिले में ‘बालिका शिक्षा को अब नई मजबूती’ मिलने जा रही है। ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों के लिए अब 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई के साथ रहने-खाने की सुविधा भी यहीं मिलेगी। सरकार की पहल पर बबेरू के पल्हरी और नरैनी के रगौली भटपुरा करतल में करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से 2 नए कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय बनकर तैयार हो गए हैं। इन दोनों विद्यालयों में कुल 800 छात्राओं के पढ़ने और रहने की व्यवस्था होगी।

बांदा में 'बेटियों' की 'शिक्षा को पंख': दो नए स्कूल शुरू, आठ सौ छात्राओं को मिलेगा आवासीय लाभप्रत्येक विद्यालय में 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई होगी। हर ‘कक्षा में 100-100 छात्राओं के प्रवेश’ की क्षमता है। इस हिसाब से एक विद्यालय में 400 और दोनों में कुल 800 छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर सकेंगी। स्कूलों में ‘एकेडमिक ब्लॉक के साथ बालिका छात्रावास’ भी बनाया गया है। प्रत्येक विद्यालय के ‘निर्माण पर करीब 5 करोड़ रुपये की लागत’ आई है। कार्यदायी संस्था सीएनडीएस ने दोनों स्कूलों को ‘बेसिक शिक्षा विभाग को हैंडओवर’ कर दिया है। बबेरू स्कूल का निर्माण एसपी एसोसिएट्स और नरैनी स्कूल का निर्माण अभय कंस्ट्रक्शन ने किया है।

दस करोड़ का तोहफा: दो नए कस्तूरबा विद्यालय तैयार, 800 बेटियों का बदलेगा भविष्यमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 9 जुलाई को बांदा दौरे के दौरान इन दोनों विद्यालयों का लोकार्पण किया था। अभी 9वीं कक्षा में 25-25 छात्राओं का प्रवेश हो चुका है और उनकी ऑनलाइन कक्षाएं चल रही हैं। सुरक्षा को देखते हुए विद्यालय परिसर में बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया जा रहा है। काम पूरा होने के बाद करीब एक महीने में नियमित कक्षाएं शुरू कराई जाएंगी। जिले के लिए कुल 4 स्कूल स्वीकृत हुए थे। बिसंडा और बड़ोखर खुर्द में भी निर्माण पूरा हो चुका है। सीडीओ अजय पांडेय की टीम ने निरीक्षण कर कमियां गिनवाई थीं, जिन्हें अब दूर कर लिया गया है। अब ”दोनों विद्यालयों के हैंडओवर की प्रक्रिया’ चल रही है।

बांदा में 'बेटियों' की 'शिक्षा को पंख': दो नए स्कूल शुरू, आठ सौ छात्राओं को मिलेगा आवासीय लाभइन स्कूलों के शुरू होने से ‘उन परिवारों की बेटियों को सबसे अधिक लाभ’ मिलेगा जिन्हें ‘दूर के क्षेत्रों में पढ़ाई के लिए आवागमन की परेशानी उठानी’ पड़ती थी। अब उन्हें अपने जिले में ही 12वीं तक की शिक्षा के साथ रहने और पढ़ने की सुविधा मिल सकेगी। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों का उद्देश्य ‘आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों’ को ‘बेहतर शिक्षा’ उपलब्ध कराना है। नए विद्यालयों के शुरू होने से जिले में माध्यमिक स्तर पर बालिका शिक्षा का दायरा बढ़ेगा और अधिक छात्राएं अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ा सकेंगी।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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