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आयुर्वेद का 'काला खेल' ! 'बैन' दवाओं की 'धड़ल्ले' से बिक्री, विभाग खामोश !
उत्तर प्रदेश

आयुर्वेद का ‘काला खेल’ ! ‘बैन’ दवाओं की ‘धड़ल्ले’ से बिक्री, विभाग खामोश !

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिले में आयुर्वेद के नाम पर चल रहे “नकली दवाओं के कारोबार” ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश स्तर पर 32 दवाओं पर रोक लगने के बावजूद चित्रकूट मंडल में इनकी बिक्री पर प्रभावी कार्रवाई न होना विभागीय लापरवाही या मिलीभगत की ओर इशारा कर रहा है।

आयुर्वेद का 'काला खेल' ! बैन दवाओं की धड़ल्ले से बिक्री, विभाग खामोश !

करीब डेढ़ साल पहले आयुर्वेद निदेशक ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए 32 दवाओं के उत्पादन, परिवहन और बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी थी। इन दवाओं में से 10 को पूरी तरह नकली और 22 में एलोपैथिक दवाओं की खतरनाक मिलावट पाई गई थी। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर हालात “जस के तस” बने हुए हैं।

बांदा में आयुर्वेद की प्रतिबंधित 32 दवाओं की हो रही बिक्री: क्यों नहीं लग रही रोक

जांच में जिन दवाओं को नकली पाया गया, उनमें ज्वाला दाद, रूमो प्रवाही, सुंदरी कल्प सीरप, त्रयोदशांक गुग्गुल, वेदान्तक बटी, एसीन्यूट्रा लिक्विड, आंवला चूर्ण, सुपर सोनिक कैप्सूल, बोस्टा-400 टैबलेट और बायना प्लस कैप्सूल शामिल हैं। वहीं कई दवाओं में एलोपैथिक तत्वों की मिलावट ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।

बांदा में आयुवेर्दिक दवाओं का का नकली बाजार ? खामोश है सरकारी विभाग !

जैसे डाइक्लोफेनिक, आइबुप्रोफेन, प्रेडनिसोलोन, बीटामैथासोन, ग्लीम्पैराइड जैसे रसायन कुछ दवाओं में शुगर की मात्रा और अन्य अवैध मिश्रण भी पाए गए। यह मिलावट मरीजों के स्वास्थ्य के लिए “बेहद खतरनाक” मानी जाती है। आयुर्वेद निदेशक ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि इन दवाओं की बिक्री तत्काल रोकी जाए और संबंधित दुकानों पर सख्त जांच की जाए।

बांदा में आयुवेर्दिक दवाओं का का नकली बाजार ? खामोश है सरकारी विभाग !

इसके लिए क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारियों को निरीक्षण के आदेश भी दिए गए थे। लेकिन आदेश के बाद भी बाजार में ये दवाएं कैसे बिक रही हैं? जांच क्यों नहीं हुई या हुई तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतने गंभीर मामले में लगभग डेढ़ साल से विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई। क्या जिम्मेदार अफसर जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं? या फिर इस पूरे खेल में किसी स्तर पर मिलीभगत है?

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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