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खाद के लिये तड़के से लाइन, बैरंग लौट रहे किसान: पर्याप्त स्टॉक का दावें फेल !
उत्तर प्रदेश

खाद के लिये तड़के से लाइन, बैरंग लौट रहे किसान: पर्याप्त स्टॉक का दावें फेल !

विनोद कुमार मिश्रा ( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिले भर में किसानों के लिये खाद संकट गहराता जा रहा है। स्थिति यह है कि सुबह तड़के से ही किसान सहकारी समितियों के बाहर खाद के लिये लंबी-लंबी लाइनें लगाने को मजबूर हैं। हर दो-तीन दिन में समितियों में खाद की रैक पहुँचने के बाद ही वितरण हो रहा है, लेकिन उसके बाद भी प्रतिदिन सैकड़ों किसान खाली हाथ लौट रहे हैं। विभाग का दावा है कि जिले में पर्याप्त खाद का स्टॉक मौजूद है और किसानों को केवल खरीफ फसल के लिये आवश्यकता अनुसार खाद लेना चाहिए। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है।

खाद के लिये तड़के से लाइन, बैरंग लौट रहे किसान: पर्याप्त स्टॉक का दावें फेल !

जिले में खाद वितरण के कुल 62 केंद्र हैं। इनमें 47 बी-पैक्स, क्रय-विक्रय सहकारी समिति लिमिटेड, सहकारी संघ व पीएसीएफ के पांच-पांच केंद्र शामिल हैं। फिलहाल जिले में 358 मीट्रिक टन यूरिया, 379 मीट्रिक टन डीएपी और 18 मीट्रिक टन एनपीके उपलब्ध बताया जा रहा है। इसके अलावा बफर स्टॉक में 553 मीट्रिक टन यूरिया और 340 मीट्रिक टन डीएपी मौजूद है, लेकिन एनपीके पूरी तरह खत्म हो चुका है। खरीफ सीजन में अब तक जिले में 4086 मीट्रिक टन यूरिया, 4230 मीट्रिक टन डीएपी और 379 मीट्रिक टन एनपीके किसानों में बाँटा जा चुका है। विभाग का दावा है कि बीते वर्ष की तुलना में इस बार 862 मीट्रिक टन यूरिया और 326 मीट्रिक टन डीएपी अधिक वितरित हुआ है।

बांदा के किसानों में खाद के लिये हाहाकार, कब सुनेगी योगी सरकार" !

सोमवार को मंडी क्षेत्र की तीन समितियों में 1200 मीट्रिक टन खाद का वितरण किया गया, लेकिन करीब एक सौ किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ा। यही हाल बिसंडा, नहरी, नारायणपुर, सुनहुली, पपरेंदा और गिरवां समितियों का रहा। अधिकांश समितियों में दोपहर एक बजे तक ही स्टॉक खत्म हो गया। लंबी कतारों में खड़े किसान दिनभर की मशक्कत के बाद भी मायूस हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो खरीफ फसलों की बढ़वार पर असर पड़ेगा। वहीं, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता अंसल कुमार का कहना है कि समिति में पर्याप्त स्टॉक है और डिमांड के मुताबिक लगातार आपूर्ति की जा रही है। लेकिन खाद की उपलब्धता और वितरण पर विभाग चाहे जितने दावे कर ले,हकीकत दावे के विपरीत हैं।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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