- विनोद मिश्रा
बांदा। कोरोना महामारी की तीसरी लहर में बच्चों के चपेट में आने की संभावना बताई जा रही है। इससे निपटने और बच्चों को कोविड से बचाने के लिए शासन ने चित्रकूटधाम मंडल के राजकीय मेडिकल कालेज और जिला अस्पतालों में तैयारियों के निर्देश दिए हैं। पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) की स्थापना जोरशोर से शुरू हो गई। मंडल के एकलौते राजकीय मेडिकल कालेज में मौजूदा में छह बेड का पीआईसीयू है। इसकी क्षमता बढ़ाकर 50 से 100 बेड का किया जा रहा है।

हालांकि, बेड बढ़ाने के लिए मौजूदा आइसोलेशन वार्ड के बेडों में कटौती की जाएगी। मेडिकल कालेज प्रशासन के मुताबिक, पीआईसीयू संचालन में मैन पॉवर कमी रोड़ा अटका सकती है। मुख्यमंत्री ने आईसीयू की तर्ज पर बच्चों के इलाज के लिए विशेष व्यवस्थाओं से लैस पीआईसीयू चालू करने के निर्देश दिए हैं। राजकीय मेडिकल कालेज में पीआईसीयू का संचालन शुरू हो गया। हालांकि, अभी यहां सिर्फ छह बेड हैं। अब इसे बढ़ाकर 50 बेड का किया जा रहा है। बच्चों के लिए 35 नए बेड आ गए हैं।

आइसोलेशन वार्ड के बेडों में भी कटौती कर पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट में डाले जाएंगे। प्रधानाचार्य डा. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मुख्यमंत्री ने पीआईसीयू पर विशेष जोर दिया है। इसी क्रम में दो-तीन दिन में पीआईसीयू की क्षमता 50 बेड की हो जाएगी। इसमें 25 फीसदी बेड भरने पर तुरंत 100 बेड कर दिए जाएंगे। जरूरत पड़ी तो आइसोलेशन वार्ड के बेड कम कर दिए जाएंगे। तैयारियां शुरू हो गईं। एक माह से कम उम्र के बच्चों को एनआईसीयू (न्यू बॉर्न इंटेंसिव केयर यूनिट) में रखा जाएगा। एक साल से 12 साल तक की उम्र के बच्चों को पीआईसीयू में भर्ती किया जाएगा। बच्चों की देखभाल के लिए मैन पावर की ज्यादा जरूरत होगी। कोविड बच्चों की देखरेख में उनके माता-पिता को वार्ड में जाने की अनुमति नहीं रहेगी। ऐसे में बच्चे की अच्छी बच्चों की देखभाल के लिए मैन पावर की ज्यादा जरूरत होगी। बच्चे की अच्छी केयर का जिम्मा नर्सिंग स्टाफ की होगी।

– एमबीबीएस के 100 छात्र, इंटर्नशिप के 86 डाक्टर देंगे सेवा
कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए शासन ने इंटर्नशिप डाक्टरों और फाइनल ईयर के एमबीबीएस छात्र-छात्राओं व नर्सिंग स्टाफ को ड्यूटी पर लगाने की अनुमति दे दी है। चार बाल रोग विशेषज्ञ सहित इंटर्नशिप के 86 डाक्टर और एमबीबीएस फाइनल ईयर (अंतिम वर्ष) के 100 प्रशिक्षार्थियों को काम में लगाने की अनुमति शासन ने मंजूर कर दी है। नर्सिंग स्टाफ रखा जाना बाकी है। अंतिम वर्ष के नर्सिंग स्टाफ भी नियुक्ति के लिए आवेदन कर सकती हैं। मेडिकल कालेज परिसर में उन्हें रहने-खाने की व्यवस्था रहेगा।

बच्चों वाले बेड (रेलिंग लगे हुए), एयर कंडीशनर, रेडिएंट वार्मर, वेंटीलेटर, मास्क, ऑक्सीजन सेंट्रल सप्लाई, कार्डिक मानीटर, बच्चों की दवाएं, गले में डालने की ऑक्सीजन ट्यूब, इनफ्यूजन पंप, पल्स ऑक्सीमीटर, लेरिंगोस्कोप, मल्टीपैरामीटर आदि एक दर्जन से ज्यादा उपकरण की जरूरत होगी।

पीआईसीयू में भर्ती बच्चों की देखभाल और इलाज के लिए तैयारी पूरी कर ली गई। ड्यूटी प्लान भी तैयार कर लिया गया। एक बेड पर एक नर्स तैनात की जाएगी। जिसकी जिम्मेदारी सिर्फ बच्चों की देखरेख करना होगी, क्योंकि कोविड बच्चों के साथ उसके माता-पिता यूनिट में नहीं रह सकते। बाल रोग विशेषज्ञ लगातार बच्चों की निगरानी करेंगे। अंतिम वर्ष के एमबीबीएस छात्र-छात्राएं भी एक बेड की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनकी सेहत की पूरी रिपोर्ट सीनियर डाक्टर को देंगे।

सीएमओ डा. एनडी शर्मा ने बताया कि जिला अस्पताल में भी छह बेड का पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) बनाने की तैयारी शुरू हो गई। अस्पताल परिसर में कक्ष का चयन कर लिया गया है। शीघ्र पीआईसीयू चालू हो जाएगा। बेड और उपकरणों की मांग की गई है। जल्द उपलब्ध होने की उम्मीद है। बताया कि जिला अस्पताल सहित सीएचसी व पीएचसी में कुल 12 बाल रोग विशेषज्ञ हैं। प्रत्येक बेड पर एक विशेषज्ञ का मानक है।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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