- विनोद मिश्रा
बांदा । रामबहादुर जिस बेचैनी के साथ अमृतसर से घर लौटने की जिद कर रहा था। वतन की माटी में आने के बाद किसी से ठीक ढंग से घुल मिल नहीं सका है। मां कुसमा जहां 12 साल बाद आए पुत्र की बलैया लेते नहीं थक रही हैं। वहीं उसका राम सभी को न पहचानते हुए 24 घंटे में सिर्फ दो पड़ोसियों को पहचान पाया और उनका नाम लेकर पुकारा है।

पाकिस्तान की जेल में 12 वर्ष का लंबा वक्त गुजारने के बाद घर आए रामबहादुर की दिनचर्या का अधिकतर समय सोने में ही व्यतीत हो रहा है। चौबीस घंटे से ज्यादा समय गुजर जाने के बावजूद वह अभी तक माता- पिता सहित अपने स्वजन को नहीं पहचान पा रहा है।

मां कुसमा तो उसके सिर पर हाथ रख पुरानी बातों की याद दिलाते हुए इस आशा के साथ बैठी रहती है कि एक बार राम मां कहकर तो पुकार दे। भाई के मुख से बहन रानी अपना नाम सुनने को तरस रही है। पिता व छोटा भाई रामबहादुर की मनोदशा देखकर दु:खी हैं।

स्वजन के प्रेम को न समझते हुए रामबहादुर भाई मैकू के साथ जब थोड़ी देर के लिए घर के बाहर निकला तो सामने 46 वर्षीय साथी मइयादीन प्रजापति व पड़ोसी 55 वर्षीय बहोरी को देख नाम लेकर जरूर पुकार बैठा। मामा, बहनोई समेत अन्य रिश्तेदार अभी भी रुके हुए हैं। लापता होने के पूर्व के उसके साथी लवकुश त्रिपाठी भी शुक्रवार को उससे मिल पुरानी यादें ताजा कराने का प्रयास किया, लेकिन वह गुमसुम रह शांत रहा।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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