
- विनोद मिश्रा
बांदा। बांदा से कबरई को ‘जोड़ने’ वाला राष्ट्रीय राजमार्ग ‘खैरादा’ के पास आकर ‘अपनी बदहाली’ की कहानी ‘खुद बयां’ कर रहा है। ‘रेलवे फाटक’ के आसपास राजमार्ग पर इतने ‘बड़े-बड़े’ गड्ढे हो गए हैं कि ‘राजमार्ग कम, तालाब ज्यादा’ लगता है। फाटक बंद होते ही दोनों तरफ वाहनों की ‘लंबी कतार’ लग जाती है और खुलने के बाद भी ‘गड्ढों’ के कारण गाड़ियां ‘रेंग-रेंग’ कर निकलती हैं। इससे रोजाना घंटों ‘जाम’ लगा रहता है।
छोटी गाड़ियों और दोपहिया वाहन सवारों का ‘निकलना’ सबसे ज्यादा ‘मुश्किल’ है, आए दिन लोग गिरकर ‘घायल’ हो रहे हैं। प्रश्न ‘निर्माण’ कराने वाले विभाग और ‘कार्यदायी संस्था’ पर है। करोड़ों की लागत से बना राष्ट्रीय राजमार्ग इतनी जल्दी क्यों उखड़ गया ? मरम्मत के नाम पर सिर्फ गिट्टी डालकर ‘खानापूर्ति’ कर दी जाती है, जो ‘पहली बारिश में बह’ जाती है। ठेकेदार मस्त है और रोजाना सफर करने वाली ‘जनता परेशान’ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारी ‘वातानुकूलित कार्यालयों’ से ‘बाहर’ निकलकर ‘हकीकत’ नहीं देखते। स्कूली बच्चे, मरीज और नौकरी पेशा लोग इस ‘जाम और गड्ढों ‘के कारण रोज परेशान हैं। लोगों ने ‘मांग’ की है कि ‘जल्द से जल्द’ राजमार्ग की ‘गुणवत्ता’ सुधारी जाए और ‘फाटक पर जाम’ से ‘राहत’ के लिए ‘स्थायी समाधान’ किया जाए।
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