
- शरद मिश्रा
बांदा। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को “लगभग चार माह शेष” रह गए हैं और बांदा सदर सीट का “सियासी समीकरण धीरे-धीरे साफ” होता दिख रहा है। इस सीट पर भाजपा के “दो बार” के विधायक प्रकाश द्विवेदी के लिए “उनका व्यक्तित्व” ही “सबसे बड़ा राजनीतिक वरदान” बन गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका “सहज, सरल और मिलनसार स्वभाव” चुनाव से पहले ही “प्रतिद्वंद्वी” की “आधी ताकत खींच” लेता है।
यह बात अब “जनचर्चा” में भी है। दूसरी बार विधायक होने के बाद प्रकाश द्विवेदी ने “जाति-पाति” से “ऊपर” उठकर “सर्व समाज” को “साथ” लेकर चलने की “राजनीति” की है।
इसका “परिणाम” यह है कि “ब्राह्मण समाज” जहां उनके “साथ 90 प्रतिशत” तक “एकजुट” है, वहीं “क्षत्रिय, वैश्य, पिछड़ा और दलित वर्ग” में भी उनकी “मजबूत पकड़” है।
हर वर्ग के “सुख-दुख” में खड़े रहने और 24 घंटे उपलब्ध रहने की उनकी “छवि” ने उन्हें “जन-जन” का “नेता” बना दिया है। इसीलिए सदर क्षेत्र में आज “जय प्रकाश-तय प्रकाश” का नारा “तकिया कलाम” बन चुका है।
“गांव-गांव” और “गली-गली” में यही “नारा” सुनाई देता है। भाजपा “आलाकमान” भी इस “जनभावना को समझ” रहा है और “तीसरी बार” भी उनका “टिकट” लगभग तय माना जा रहा है।
दूसरी तरफ “विपक्ष” की स्थिति “बेहद कमजोर नजर” आ रही है। सपा, बसपा और कांग्रेस में कई “बरसाती मेंढक” चुनाव आते ही “टर्र-टर्र” करने लगे हैं, लेकिन “कोई भी ऐसा बड़ा चेहरा” सामने नहीं “आया” है जो “प्रकाश द्विवेदी के व्यक्तित्व और जनाधार” के सामने “टिक” सके। फिलहाल “सारी परिस्थितियां” प्रकाश द्विवेदी के पक्ष में “अनुकूल” दिखाई दे रही हैं।
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