
- शरद मिश्रा
बांदा। डबल इंजन की सरकार, डिजिटल इंडिया और स्कूल चलो अभियान के “खोखले दावों” की “कलई” पैलानी तहसील के ग्राम निवाईच में “खुलकर सामने आ” गई है। यहां पूर्व माध्यमिक विद्यालय तक जाने का “रास्ता” ऐसा है कि “बच्चे पढ़ने नहीं, दलदल से जंग लड़ते” हुए स्कूल पहुंच रहे हैं। बारिश में “स्कूल मार्ग पूरी तरह कीचड़ में तब्दील” हो गया है। छोटे-छोटे छात्र-छात्राएं घुटने भर दलदल में फंसकर, हाथ में बस्ता उठाए रोजाना जान जोखिम में डालकर पढ़ाई के लिए जाते हैं। “एक फिसलन और कोई भी बच्चा गंभीर रूप से घायल” हो सकता है।
आश्चर्य भरी बात है की तीन पंचवर्षीय कार्यकाल बीत गए, तीन प्रधान बदल गए, फंड आया और गया, लेकिन स्कूल को जोड़ने वाली 200 मीटर की पटरी आज तक नहीं बन सकी। मौके पर मौजूद ग्राम प्रधान भी हालात पर “चुप्पी” साधे रहे। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को भी गांव की इस बदहाली से कोई सरोकार नहीं।
यहां के लम्बरदार शिवशंकर द्विवेदी “तंज” कसते हुए कहते हैं की “मिजाज गांव” का कहता है कि “विकास कहां रहता है, हम तो कल भी नरक में थे और आज भी दलदल बहता” है। इस संबंध में एसडीएम भूपेंद्र सिंह ने कहा कि उन्होंने हाल ही में कार्यभार संभाला है। संबंधित अधिकारियों से बात कर “सड़क की स्थिति का निरीक्षण” कराया जाएगा और जल्द समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा।
सरकारें शिक्षा को “मंदिर“बताती हैं, बेटियों को पढ़ाने का दावा करती हैं। लेकिन “जब मंदिर तक जाने का रास्ता ही नरक” हो तो ये “विकास नहीं, व्यवस्था की नाकामी और प्रशासनिक लापरवाही” का सबसे “बड़ा तमाचा” है। अब देखना है कि प्रशासन इस दलदल से बच्चों को निजात दिलाता है या निवाईच के “मासूम इसी कीचड़” में अपना “भविष्य तलाशते” रहेंगे।
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