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October 15, 2026
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Shivdeep Lande: कहां गुम हो गए ‘दबंग’ IPS शिवदीप लांडे, सियासी पारी शुरू होने से पहले ही क्या खत्म हो गई?

पटना | बिहार चुनाव की आहट शुरू हो गई है. बड़े-बड़े राजनीतिक घुरंधर मैदान में या तो उतर गए हैं या उतरने की तैयारी में लग गए हैं. प्रशांत किशोर से लेकर पुष्पम प्रिया चौधरी तक जनता के बीच खाक छान रहे हैं. लेकिन वह शख्स अचानक कहां गायब हो गया, जिसने राजनीति में आने के लिए आईपीएस की नौकरी को लात मार दिया था. बिहार कैडर के तेजतर्रार आईपीएएस अधिकारी शिवदीप लांडे कहां हैं? शिवदीप लांडे क्या गुम हो गए हैं? शिवदीपप लांड की हिंद सेना बिहार में क्यों कहीं नजर नहीं आ रही है? क्या शिवदीप लांडे इस बार का बिहार चुनाव नहीं लडेंगे? ये कुछ सवाल हैं, जो बिहार चुनाव से पहले लोगों के मन में उठ रहे हैं.

बिहार में अपनी ‘दबंग’ छवि के लिए मशहूर रहे आईपीएस अधिकारी शिवदीप लांडे एक बार फिर चर्चा में हैं. हालांकि, इस बार उनकी चर्चा किसी आपराधिक घटना को सुलझाने या अपराधियों को पकड़ने के लिए नहीं, बल्कि उनकी गुमशुदगी के लिए हो रही है. बिहार चुनाव से ठीक पहले यह अटकलें तेज थीं कि लांडे ने पुलिस की नौकरी से वीआरएस लेकर चुनाव लड़ेंगे. उन्होंने खुद की ‘हिंद सेना’ बनाकर चुनाव मैदान में उतरने की भी बात की थी. लेकिन बिहार चुनाव अब अपने शबाब पर है और शिवदीप लांडे कहीं भी नजर नहीं आ रहे हैं.

कहां गुम हो गया बिहार का यह ‘दबंग’ पुलिस अधिकारी?

लांडे को उम्मीद थी कि उनकी साफ-सुथरी छवि और जनता के बीच उनकी पकड़ उन्हें चुनाव में जीत दिला सकती है. लेकिन, बिहार की राजनीति उतनी सीधी नहीं है जितनी दिखती है. लांडे बिहार के एक्स पोस्ट से लगता है कि वह बिहार में सक्रिय हैं, लेकिन बिहार चुनाव 2025 लड़ने का कोई इरादा नहीं है. क्योंकि, वह सिर्फ सामाजिक कार्यक्रमों में ही भाग ले रहे हैं. पूर्णिया, अररिया औऱ किशनगंज इलाके में उनकी मौजूदगी कुछ ज्यादा ही नजर आ रही है. जनता और समर्थकों से मिल तो रहे हैं लेकिन चुनाव लड़ने की कोई इच्छा उनके सोशल मीडिया पोस्ट से दिख नहीं रहा है.

क्या फिर करेंगे नौकरी में वापसी?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवदीप लांडे का राजनीति से दूर होना कोई संयोग नहीं है. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. पुलिस की नौकरी में एक अधिकारी के पास बहुत अधिकार होते हैं, लेकिन राजनीति में हर कदम पर समझौता और लोगों से मिलना-जुलना होता है. हो सकता है कि उन्हें राजनीति की जमीनी हकीकत का सामना करना पड़ा हो, जो उनकी उम्मीदों से बिल्कुल अलग थी. दूसरी बात पैसों और संगठन की कमी भी लांडे को राजनीति से दूर कर सकता है. एक नई पार्टी बनाना और उसे चलाना कोई आसान काम नहीं है. इसके लिए भारी मात्रा में पैसा और एक मजबूत संगठन की जरूरत होती है. हो सकता है कि लांडे अपनी पार्टी के लिए यह सब जुटाने में असफल रहे हों.
 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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