लखनऊ : सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि प्रदेश की राजनीति में भाषा व आचरण में गिरावट चिंतनीय है। आरोप-प्रत्यारोप और धमकी का कोई जगह नहीं हो सकता है। जो राजनीति में उन्हें सार्वजनिक जीवन की गरिमा बनाए रखनी चाहिए। हाल ही विधानमंडल में जिस भाषा व व्यवहार का प्रदर्शन किया गया, वह लोकतांत्रिक मान्यताओं की गरिमा को गिराने वाला है। लोकशाही में एकाधिकारी मानसिकता का प्रदर्शन अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और अवांछनीय है।

अखिलेश ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि लोकलाज से ही लोकराज चलता है। मुख्यमंत्री द्वारा सत्ता का दुरुपयोग, ‘ठोक दो, ऐसी डोज दूंगा कि दर्द दूर हो जाएगा,’ जैसी भाषा का प्रयोग अहंकारी मनोदशा का सूचक है।

जनता सब देख रही है। सदन से सड़क तक भाजपा के चाल और चरित्र का वास्तविक चेहरा सामने आ चुका है। उन्होंने कहा, सपा ही भाजपा का विकल्प है। भाजपा को वर्ष 2022 में किसानों, नौजवानों समेत सभी वर्ग के लोगों का आक्रोश भारी पड़ने वाला है।
उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि भाजपा को किसानों से इतनी नफरत क्यों है। किसान कई माह से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने उनके साथ वार्ता कर समस्या समाधान की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है। भाजपा अपने संकल्प पत्र में किए वादे को भी भूल गई है।

जनप्रतिनिधि जब जनता की परेशानियों से संबंधी सवाल करते हैं, उनके वादों पर जवाब मांगते हैं तो भाजपा भड़क जाती है। जनता को डराने वाली भाजपा अब खुद चुनाव में जाने से पहले डर रही है। उन्होंने कहा, लोकतंत्र में जनता के पास ही पूरी ताकत होती है। उसी के वोट से सरकारें बनती-बिगड़ती हैं। सत्ता के मद में जनता की अनदेखी करना भाजपा के लिए भारी पड़ेगा।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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