- विनोद मिश्रा
बांदा। जिला मुख्यालय के लिये सनसनी खेज खबर के साथ ही प्रशासन के लिये भूमाफियाओं की चुनौती भी है, क्योकि शहर के ऐतिहासिक तथा पुरातत्व महत्वत के छत्रसाल संग्रहालय व वाचनालय के भवन और उसकी भूमि पर माफियाओं द्वारा अवैध कब्जे कर सरकारी भूमि का विक्रय भी किया जा रहा है।

प्रशासनिक कुशलता के धनी आयुक्त दिनेश कुमार सिंह और जिलाधिकारी आनंद कुमार सिंह के संज्ञान में लादूँ कि इस खबर का केंद्र बिंदु शहर के मोहल्ला कालूकुआं(सूतर खाना)है। यहीं पर मुख्यरोड पर पुरातत्व महत्व का छत्रसाल संग्रहालय वाचनालय की इमारत व भूमि है। इस पर दबंग भूमाफियाओ की निगाह लंबे अर्से से लगी हुई है। और करोड़ो की इस भूमि को खुर्द-बुर्द करने की लगातार कोशिशे की जा रही हैं। अवैध कब्जे भी माफियाओं नें संगठित गिरोह बनाकर किया है। यह भूमि गाटा संख्या 56 व 56/1राजस्व अभिलेखों में सरकारी पट्टे के रूप में दर्ज ” कैशर हिंद बहादुर” अर्थात सरकार की मलकियत है। परंतु दुर्भाग्यवश इस कोरोना आपदा का लाभ उठाकर तथा कुछ राजस्व कर्मचारियों की मिली भगत से बिजली खेड़ा निवासी कथित दबंग भू माफिया संतू लोध व आवास विकास निवासी शिव शरण सिंह पिपरहरी आदि इस सरकारी भूमि पर कब्जा, विक्रय तथा निर्माण कार्य कर रहे हैं। तथा ऐतिहासिक धरोहर संग्रहालय को नष्ट कर रहे हैं।

शहर के मध्य स्थिति इस सरकारी पट्टे की भूमि को संतू लोध व उसके भूमाफिया साथी दस रुपये के स्टाम्प में गैर कानूनी ढंग से बेच रहे हैं। पांच वर्ष पहले भी इन्हीं कथित भूमाफियाओं नें संग्रहालय के पूर्व दिशा स्थिति भवन में अवैध कब्जा कर निर्माण करवा रहा था जिसे प्रशासन नें सूचना मिलने पर जेसीबी से गिरवा दिया था अब भूमाफिया वहां पुनः मैरिजहाल तथा टेंट हाउस बनवाया जा रहा है,अन्य निर्माण भी आज से जारी कर दिया है,जो चुनौती ही तो माना जायेगा !

प्रशासन को चाहिए कि ऐतिहासिक एवं पुरातत्व महत्व की धरोहर इस सरकारी भूमि की रक्षा के लिये सक्षम प्रशासनिक अधिकारी से मौके एवं संबंधित राजस्व अभिलेखों की दस्तावेजी जांच तत्काल करवाई जाये और दोषी जनों के विरुध्द सुसंगत धारओं में कठोर कार्यवाई हो।

यहां यह भी अवगत करा देना जरूरी है कि वर्ष 2010 में शासन के तत्कालीन संस्कृति सचिवअवनीश अवस्थी नें इस संग्रहालय का निरीक्षण कर काया-कल्प करवाया था। 11 दिसंबर 2019 को तत्कालीन डीएम हीरालाल एवं पुलिस अधीक्षक गणेश साहा नें इस संग्रहालय, वाचनालय का निरीक्षण किया था तो यह जीर्ण शीर्ण हालत में पाया गया। खिड़कियाँ-दरवाजे तक टूटे हुये थे।इसके बाद डीएम नें प्रशानिक अधिकारियों के साथ बैठक कर संग्रहालय एवं वाचनालय में रखी प्राचीन बेशकीमती मूर्तियाँ एवं पाण्डुलिपियों को संरक्षित करने के लिये एनजीओ की व्यवस्था करने को कहा था, जो इस कार्य में रुचि ले। इसके लिये तत्कालीन कलक्ट्रेट के प्रशासनिक अधिकारी सईद अहमद को जिम्मेदारी भी सौपी थी। यह भी कहा था कि संग्रहालय में कौन कौन सी कितनी मूर्तियाँ और पाण्डुलिपियां हैं उसकी गणना भी कराई जाये। डीएम नें भारतीय पुरातत्व विभाग केअवर संरक्षक सहायक सचिन कौशिक को निर्देश दिये थे किसंग्रहालय का निरीक्षण कर मूर्तियों और पाण्डुलिपियों के बारे में रिपोर्ट दें जिससे अमूल्य धरोहरो को बचाया एवं संरक्षण किया जा सके।लेकिन वर्तमान में भूमाफियाओं की गिध्द नजर इसकी भूमि पर लग गई हैं।चारों तरफ से बांस बल्लियों का घेरा एवं रखरखाव है, निर्माण बिक्री शुरू है,जबकि सरकारी नजूल की भूमि बिक्री कानूनन की ही नहीं जा सकती।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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