
- विनोद मिश्रा
बांदा। जिले से ऐसा घोटाला सामने आया है, जिसने न केवल शिक्षा विभाग बल्कि पूरे शासन-प्रशासन को हिला कर रख दिया है। महिला शिक्षक से ट्रांसफर कराने के नाम पर जिले के डीआईओएस दिनेश कुमार पर 1.10 लाख रुपए रिश्वत लेने का आरोप लगा है। इतना ही नहीं, जब पीड़िता ने शिकायत दर्ज कराई तो उल्टा उसे धमकियां दी गईं। इस पूरे मामले में टीचर के पास रिश्वतखोरी का वीडियो और धमकी का ऑडियो सबूत मौजूद है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ लीपापोती हो रही है। हालांकि हम आडियो और वीडियो की सत्यता की प्रामाणिक पुष्टि नहीं करते।

मिर्जापुर निवासी आरती, जो बांदा के राजकीय हाई स्कूल जखनी में हिंदी की सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत हैं, ने 1 जून 2025 को मानव संपदा पोर्टल पर ट्रांसफर के लिए आवेदन किया। अगले ही दिन डीआईओएस ने उन्हें सर्किट हाउस स्थित अपने आवास पर बुलाया। डेढ़ लाख रुपये की डिमांड कर दी। मोलभाव के बाद सौदा 1.20 लाख में तय हुआ। 4 जून को पहली किस्त के रूप में 40,000 रुपये नगद लिए गए। 6 जून को दूसरी किस्त भी टीचर और उनके पति से वसूली गई। यही नहीं, दूसरी किस्त देते समय महिला और उसके पति ने हिडन कैमरे से पूरी डील का वीडियो बना लिया।

वीडियो में डीआईओएस के हाथों में नगद रकम साफ दिखाई देती है। 14 जून को ट्रांसफर लिस्ट में आरती का नाम आया, लेकिन स्कूल के नाम में गड़बड़ी कर दी गई। शिकायत पर जुलाई में संशोधित लेटर जारी हुआ। डीआईओएस ने लेटर तो थमा दिया, लेकिन कार्यमुक्त करने से साफ इनकार कर दिया। महिला के अनुसार, 22 अगस्त को फिर से 30,000 रुपये नगद दिए गए। इसके बावजूद कार्यमुक्ति पत्र जारी नहीं हुआ। उल्टा जब स्कूल के प्रिंसिपल से बात हुई तो उन्होंने भी 50 हजार रुपये की नई डिमांड ठोक दी। महिला टीचर ने मजबूर होकर संयुक्त शिक्षा निदेशक और जल शक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद से शिकायत की। इस पर डीआईओएस आगबबूला हो गए। वॉट्सऐप कॉल पर उन्होंने शिक्षक दंपति को धमकी दी “मंत्री से शिकायत क्यों की? पैसे वापस ले लो। अभी हम ही अपर निदेशक बनेंगे। समझ में आया ? विहेवियर सही रखना चाहिए, वरना नौकरी से भी हाथ धोना पड़ेगा।” रिकॉर्डिंग में डीआईओएस का यह धमकी भरा लहजा साफ सुना जा सकता है।

सबसे हैरानी की बात यह है कि महिला के शिकायत पत्र पर महानिदेशक माध्यमिक शिक्षा परिषद ने जांच की जिम्मेदारी खुद आरोपी डीआईओएस को सौंप दी। प्रश्न यह है कि जिस अधिकारी पर रिश्वत और धमकी का आरोप है,क्या वह खुद ही निष्पक्ष जांच कर पाएगा ? यही वजह है कि मामला अब सीएम ऑफिस तक पहुंच चुका है। मंत्री स्तर तक शिकायत जाने के बावजूद न तो टीचर को रिलीविंग लेटर मिला और न ही वसूले गए पैसे लौटाए गए। उल्टा आरोपी डीआईओएस अपनी पकड़ और रसूख का बखान करते रहे। इस पूरे प्रकरण ने शिक्षा विभाग की साख पर गंभीर प्रश्न चिंह लगा दिया है।
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