- विनोद मिश्रा
बांदा। केन व यमुना के रौद्र रूप लेने के बाद जहां दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में फंसते नजर आ रहे हैं, वहीं सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न हो गई है। पानी में डूबने से फसल का नष्ट होना तय हो गया है। ऐसे में सैकड़ों किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। उनमें हाहाकार की सी स्थिति है।जलमग्न फसल का सर्वे कराकर मुआवजा की भी मांग उठने लगी है।

किसानों ने खरीफ की ज्वार, मूंग, उर्द, अरहर, तिल की फसल बोई थी। केन व यमुना का जलस्तर बढ़ने से नदी के आसपास सैकड़ों बीघा फसल पानी में डूब गई। कई जगहों पर तो खेतों पर ही नाव चलने लगी है। पैलानी तहसील के करीब दो दर्जन गांवों के किसानों की मेहनत पानी में डूबी नजर आ रही है। फसलें डूबने के बाद अन्नदाताओं के माथे पर चिता की लकीरें पड़ गई हैं। बेहतर पैदावार की आस संजोए किसानों के सामने सालभर गृहस्थी चलाने का संकट खड़ा हो गया है।

रेहुंटा गांव के तरी, कछार, गजहा, अमलोर के मठिया हार दड़ियाहार, बरुइन कछार हार, पैलानी कस्बे एवं पड़ोहरा हार, नांदादेव हार व सिधन कला हार, चिल्ला क्षेत्र में तारा, खजूरी हार आदि फसलें जलमग्न हो गई हैं।

बाढ़ के कहर के बीच कई बिजली सब स्टेशन भी पानी से घिर गए हैं। जिसके बाद आपूर्ति बंद कर दी गई। बाढ़ की चपेट में आ जाने पर कानाखेडा़ विद्युत उप केंद्र एवं जसपुरा उप केंद्र की विद्युत सप्लाई भी बंद कर दी गई है। कई जगहों पर खेतों के बीच झूलने वाले बिजली के तार भी पानी की चपेट में आ गए हैं।

पैलानी एसडीएम रामकुमार ने बताया कि तहसील क्षेत्र में केन, यमुना और चंद्रायल नदी की बाढ़ के कारण फसलें डूबी हैं। फसलों का सर्वे कराकर किसानों को शासन की मंशानुरूप मुआवजा दिलाया जाएगा।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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