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October 10, 2026
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रजिस्ट्री में 'झोल या सिस्टम की सुस्ती' ? दो साल बाद भी 'राज' बरकरार, जिम्मेदार हुए महान ?
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंड

रजिस्ट्री में ‘झोल या सिस्टम की सुस्ती’ ? दो साल बाद भी ‘राज’ बरकरार, जिम्मेदार हुए महान ?

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। किसानों को “सरकारी योजनाओं” से जोड़ने के लिए शुरू हुई फार्मर रजिस्ट्री खुद “सिस्टम की सुस्त रफ्तार” में “फंस” गई है। करीब “दो साल की कवायद के बाद भी जिले के 37,534 किसान रजिस्ट्री से बाहर” हैं। कहीं आधार और खतौनी के नाम का “मामूली अंतर रास्ता रोक” रहा है तो कहीं 21 गांवों का भूलेख ऑनलाइन नहीं, वहीं लेखपालों पर दूसरे विभागीय “कामों का बोझ” है। नतीजा 2.88 लाख किसानों में महज 87 फीसदी की रजिस्ट्री पूरी हो सकी और “शत-प्रतिशत लक्ष्य अब भी दूर” है।रजिस्ट्री में 'झोल या सिस्टम की सुस्ती' ? दो साल बाद भी 'राज' बरकरार, जिम्मेदार हुए महान ?फार्मर रजिस्ट्री की “धीमी रफ्तार” के पीछे “आधार कार्ड और खतौनी में दर्ज नाम” का “अंतर प्रमुख” वजहों में शामिल है। नाम या पिता के नाम में मामूली अंतर होने पर भी “ऑनलाइन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़” पा रही। कई किसानों ने सुधार के लिए आवेदन किए हैं, लेकिन “रिकॉर्ड दुरुस्त होने में समय” लग रहा है। इसके अलावा जिले के 21 गांवों का भूलेख ऑनलाइन प्रदर्शित नहीं हो रहा, जिससे वहां के “किसानों की रजिस्ट्री अटकी” हुई है। शुरुआत में “शिविर” लगाकर “रजिस्ट्री” कराई गई। इसके बाद “राजस्व कर्मचारियों को गांव-गांव और घर-घर जाकर किसानों की रजिस्ट्री कराने की जिम्मेदारी” दी गई।रजिस्ट्री में 'झोल या सिस्टम की सुस्ती' ? दो साल बाद भी 'राज' बरकरार, जिम्मेदार हुए महान ?हालांकि लेखपालों पर अन्य “विभागीय कार्यों का बोझ” होने से यह “अभियान अपेक्षित गति नहीं पकड़” सका। अब बड़ी संख्या में किसान “जन सुविधा केंद्रों का सहारा” ले रहे हैं। रिकॉर्ड सही होने पर यहां से “रजिस्ट्री” कराई जा सकती है, लेकिन “दस्तावेजी खामियों वाले किसानों की समस्या अभी बरकरार” है। समस्याओं में “आधार और खतौनी” में नाम के अंतर के कारण कई “किसानों की रजिस्ट्री नहीं” हो पा रही है। कुछ चकबंदी वाले गांवों का डाटा भी ऑनलाइन प्रदर्शित नहीं हो रहा है। इन हालातों में किसानों का “हक कागजों और तकनीकी पेंच” में “अटकने” के बजाय “समयबद्ध” तरीके से “जमीन पर पहुंचेगा या नहीं, अब निगाहें इसी पर टिकी” हैं।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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