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October 10, 2026
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ऐतिहासिक धरोहर को 'पांच करोड़' का 'तोहफा': मराठा कालीन 'विरासत' की बदलेगी तस्वीर
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंड

ऐतिहासिक धरोहर को ‘पांच करोड़’ का ‘तोहफा’: मराठा कालीन ‘विरासत’ की बदलेगी तस्वीर

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

चित्रकूट। ऐतिहासिक पहचान से जुड़े “मराठा कालीन भवन” के “संरक्षण और सौंदर्यीकरण” की दिशा में “बड़ी पहल” हुई है। “वर्षों पुरानी” इस ऐतिहासिक धरोहर को अब “आधुनिक सुविधाओं के साथ नया स्वरूप” देने की तैयारी है। पर्यटन विभाग ने भवन के “जीर्णोद्धार, फसाड लाइटिंग और परिसर के विकास” समेत विभिन्न कार्यों के लिए 5 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है।ऐतिहासिक धरोहर को 'पांच करोड़' का 'तोहफा': मराठा कालीन 'विरासत' की बदलेगी तस्वीरइस परियोजना के पूरा होने के बाद मराठा कालीन भवन की “तस्वीर” ही नहीं बदलेगी, बल्कि परिसर को चित्रकूट के पर्यटन मानचित्र पर एक “आकर्षक स्थल” के रूप में “विकसित” करने की योजना है। ऐतिहासिक विरासत के “संरक्षण” के साथ यहां आने वाले “पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर” दिया गया है।ऐतिहासिक धरोहर को 'पांच करोड़' का 'तोहफा': मराठा कालीन 'विरासत' की बदलेगी तस्वीरपरियोजना की सबसे खास बात यह है कि भवन के “जीर्णोद्धार में पारंपरिक चूना-सुरखी तकनीक” का “इस्तेमाल” किया जाएगा। इसके साथ भवन की पेंटिंग कराकर उसके ऐतिहासिक स्वरूप को “संरक्षित रखने का प्रयास” होगा। यानी विकास के नाम पर ऐतिहासिक भवन की “मूल पहचान से छेड़छाड़” के बजाय उसकी “विरासत और वास्तुशैली” को ध्यान में रखकर “संरक्षण” किया जाएगा।ऐतिहासिक धरोहर को 'पांच करोड़' का 'तोहफा': मराठा कालीन 'विरासत' की बदलेगी तस्वीरपरिसर में “फसाड लाइटिंग और स्ट्रीट लाइटिंग” की “व्यवस्था” भी प्रस्तावित है। इससे मराठा कालीन भवन रात के समय “आकर्षक नजर” आएगा। परिसर में “इंटरलॉकिंग पाथवे और हॉर्टिकल्चर” का “कार्य” भी कराया जाएगा। योजना के तहत पूरे परिसर को “वृहद पार्क के रूप में विकसित” किया जाएगा। परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा “हाट बाजार” होगा।ऐतिहासिक धरोहर को 'पांच करोड़' का 'तोहफा': मराठा कालीन 'विरासत' की बदलेगी तस्वीरइसका उद्देश्य केवल पर्यटन को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि स्थानीय कारीगरों और क्षेत्रीय उत्पादों को भी बाजार उपलब्ध कराना है। 5 करोड़ रुपये की इस परियोजना के “धरातल” पर उतरने के बाद कर्वी का मराठा कालीन भवन केवल एक ऐतिहासिक इमारत के रूप में नहीं, बल्कि “विरासत, पर्यटन, स्थानीय कला और कारोबार” को एक साथ “जोड़ने” वाले नए केंद्र के रूप में “विकसित” होने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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