
- विनोद मिश्रा
बांदा। बांदा से बबेरू होते हुए फतेहपुर को जोड़ने वाला औगासी यमुना पुल उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार के विकास के दावों की असली तस्वीर है। 2022 में बना यह पुल बिना उद्घाटन के ही जल्दबाजी में शुरू कर दिया गया, जैसे सरकार को फीता काटने से ज्यादा फोटो खिंचवाने की जल्दी थी। आज पांच साल भी पूरे नहीं हुए और पुल की “छाती फट” गई है। जगह-जगह गहरे गड्ढे हैं, गड्ढों में से लोहे की सरिया बाहर झांक रही है, मानो “पुल खुद चीख कर कह रहा हो कि मेरे अंदर सीमेंट नहीं, कमीशन भरा” गया है।
यह सिर्फ गड्ढा नहीं, यह घोटाला है। एक पुल जो पचास साल चलना चाहिए, वह पांच साल में ही मरम्मत मांगने लगे तो समझिए “नींव में गिट्टी नहीं, भ्रष्टाचार डाला” गया है। हैरानी की बात है कि इस भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए कई बार मरम्मत के नाम पर “लीपापोती” भी की गई, पर सरिया आज भी बाहर है, गड्ढे आज भी वैसे ही हैं। प्रश्न यह है कि जब जनता की जान इस पुल से रोज गुजरती है, तो सरकार की आंखें क्यों बंद हैं।
अब गेंद सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पाले में है। वह इस पुल को बनाने वाले ठेकेदार पर “कार्रवाई” करवाते हैं या नहीं। अगर कार्रवाई होती है तो माना जाएगा कि “सरकार” में अभी भी “जवाबदेही” बाकी है। अगर नहीं होती तो जनता यही समझेगी कि यह ठेकेदार कोई और नहीं, भाजपा का अपना है ? जिस पर “हाथ डालना” मना है? 2027 विधानसभा चुनाव सामने है। क्या इस पुल पर भी चुनाव से पहले सिर्फ “मलहम-पट्टी” लगा कर फिर से “चमका” दिया जाएगा। औगासी का यह पुल अब सिर्फ यमुना पर नहीं, योगी सरकार की नीयत पर बना हुआ पुल है।
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