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October 14, 2026
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किरन चौराहे पर 'कमल' का दाग: 'कलुवा बास' का फड़ जगमग, 'पर्यटक नेता' बना कलंकी ?
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंड

किरन चौराहे पर ‘कमल’ का दाग: ‘कलुवा बास’ का फड़ जगमग, ‘पर्यटक नेता’ बना कलंकी ?

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिले में कमल खिलता है या नहीं,पता नहीं,पर किरन कॉलेज चौराहे पर ‘बावन परी’ का कमल अंगूरी जल के साथ जरूर खिला हुआ है। माली हैं ‘कलुवा बास’ और खाद-पानी दे रहे हैं उनके ‘पर्यटक गुरु’। स्थानीय चर्चाओं की मानें तो गुरु-चेले की इस जोड़ी ने जुए को ‘कुटीर उद्योग’ का दर्जा दे दिया है?

किरन चौराहे पर 'कमल' का दाग: 'कलुवा बास' का फड़ जगमग, 'पर्यटक नेता' बना कलंकी ?कहा जाता है कि चौराहे पर शाम होते ही ‘बाबा के आशीर्वाद से अभिसिंचित’ ठिकाने पर फड़ सज जाती है। तक्के कमान संभाल लेते हैं। रोजाना लगभग एक लाख की ‘नाल’ का जो ‘चढ़ावा’ आता है, वह कलुवा के लिए बाएं हाथ का खेल बताया जाता है? ‘छक्का अंदर, पंजा बाहर’ के नारों के बीच यहां किस्मत नहीं, घर बर्बाद होते हैं।आरोप है कि अब कलुवा ‘सटोरिया डॉन’ बनने की ओर कदम बढ़ा चुका है ! और वह छुटपुट गैंगवार कर शहर का नया ‘स्टेटस सिंबल’ बन रहा है।

किरण कॉलेज चौराहा बना 'बावन परी का दरबार': 'सनातन भक्त' के घर में जुआं के लग रहे ठुमके?चर्चा है कि कलुवा के गुरु कभी “समुद्री ज्वार’ की तरह बांदा की सियासत में अवतरित” हुए थे। पर अब ‘पानी के बुलबुले’ हो चुके हैं। चर्चायें हैं कि खुद को ‘हवाला के हवाले’ कर चुके गुरु ने चेले को ‘नालबंदी’ के हवाले कर दिया है ? सबसे गंभीर आरोप सियासी है। स्थानीय चर्चाओं में कलुवा को ‘भाजपा से जुड़ा’ और ‘संघ का भी हाफ पैंटी’ बताया जाता है ? प्रश्न यह है कि अगर पार्टी को इस ‘जुए के अड्डे’ की जानकारी है, तो ‘गले में घंटी’ कौन बांधेगा? कहा जाता है कि संगठन ‘भयभीत अवस्था में थरथराता’ है? जब अपराध के तार सत्ता के गलियारे से जुड़ते दिखें, तो बदनामी का ‘चढ़ावा’ तो पार्टी के खाते में ही चढ़ेगा!

अनीस का नालबंद जुआ कानून व्यवस्था को चुनौती: पॉश इलाके में रोजाना लाखों का खेल !पुलिस से ‘गलबहियां’ के किस्से भी शहर में तैर रहे हैं। बावन परी की “मुरली निरंतर बज” रही हैं क्योंकि जब रक्षक ही ‘फड़’ का हिस्सेदार बन जाए, तो ‘रब्बा खैर करे’ के सिवा जनता क्या बोले? “सबके विकास” का नारा देने वाली “पार्टी के लिए किरन चौराहा ‘सबका विनाश का अड्डा” बनता जा रहा है। कलुवा की ‘नाल’ से भले तिजोरी भर रही हो, पर “कमल की साख में रोज ‘छेद’ हो रहा है। चर्चा है की गुरु नें चेले को ‘जुआं मय’ बांदा सौंपकर खुद ‘हवाला मय’ हो गए?

किरन चौराहे पर 'कमल' का दाग: 'कलुवा बास' का फड़ जगमग, 'पर्यटक नेता' बना कलंकी ?अब देखना यह है कि पार्टी इस ‘कलुवा कांड’ पर झाड़ू चलाती है, या ‘पर्यटक नेता’ के आशीर्वाद से फड़ और बड़ी होती है। क्योंकि जनता कह रही है जब पार्टी का कार्यकर्ता ‘परी नचाए,तो वोटर ‘ताली नहीं बजाता। यह भी स्पष्ट कर दूँ की मेरी यह खबर शहर में प्रचलित स्थानीय चर्चाओं,आरोपों और जनश्रुतियों पर आधारित है। इसमें उल्लेखित किसी भी व्यक्ति, नेता या संगठन के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। उद्देश्य किसी की मानहानि करना नहीं,बल्कि सार्वजनिक बहस के मुद्दों को उठाना है।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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